अगरतला, 4 नवंबर (आईएएनएस)। त्रिपुरा पुलिस ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा, ताकि बीएसएफ जवानों पर हुए हमले के मामले में फरार नौ आरोपी पड़ोसी देश बांग्लादेश भाग न सकें।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीएसएफ द्वारा दर्ज एफआईआर में 19 हमलावरों के नाम शामिल हैं। इनमें से अब तक तीन महिलाओं समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अधिकारी ने कहा कि सोमवार रात बीएसएफ कर्मियों पर हुए हमले के तुरंत बाद शुरू किया गया तलाशी अभियान अभी भी जारी है। बाकी नौ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। आशंका है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बांग्लादेश में शरण ले सकते हैं। इसी कारण बीएसएफ को सीमा पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी अवैध आवाजाही को रोकने के लिए अलर्ट किया गया है।
बीएसएफ त्रिपुरा फ्रंटियर की महानिरीक्षक प्रिंसी रानी और सिपाहीजला जिले के पुलिस अधीक्षक बिजॉय देबबर्मा ने मंगलवार को अन्य अधिकारियों के साथ सिपाहीजला जिले के भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र स्थित आशाबाड़ी इलाके का दौरा किया।
अधिकारी के अनुसार, बीएसएफ आईजी ने जवानों को सीमा सुरक्षा संबंधी सभी मानक प्रक्रियाओं का अतिरिक्त सतर्कता के साथ पालन करने का निर्देश दिया। उन्होंने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा से भी मुलाकात कर उन्हें घटना की जानकारी दी।
पुलिस के मुताबिक, बीएसएफ जवानों ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ भारतीय और बांग्लादेशी तस्करों को कथित रूप से गांजा की तस्करी करते देखा। जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और एक भारतीय तस्कर को पकड़ लिया। हालांकि, बाड़ के दूसरी ओर मौजूद बांग्लादेशी तस्कर भाग निकले।
अधिकारी ने बताया कि एक अन्य भारतीय तस्कर भी भागने में सफल रहा और उसने गांव वालों को यह कहकर भड़काया कि बीएसएफ जवानों ने उसके साथ मारपीट की है।
इसके बाद करीब 50 पुरुष और महिलाएं मौके पर जमा हो गए। उन्होंने बीएसएफ के वाहन को घेर लिया और जवानों पर हमला कर दिया। इस हमले में कंपनी कमांडर समेत तीन बीएसएफकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हमलावरों पर एक बीएसएफ जवान से पंप एक्शन गन छीनने और बीएसएफ के वाहन को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है। घटना में एक हमलावर भी घायल हुआ। बुधवार को भी क्षेत्र में तनाव बना रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बीएसएफ, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स और पुलिस ने संयुक्त रूप से फ्लैग मार्च और क्षेत्र प्रभुत्व अभियान चलाया।
बीएसएफ ने एक बयान में कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा, तस्करी पर रोक और अन्य अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए बल पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बीएसएफ ने स्थानीय लोगों से शांति, कानून-व्यवस्था और सीमा क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग की अपील की। बल ने कहा कि ड्यूटी निभा रहे जवानों को डराने या उनके काम में बाधा डालने की किसी भी कोशिश से सख्ती से निपटा जाएगा।
बयान में कहा गया कि हिंसा और धमकी की ऐसी घटनाएं बीएसएफ को अपने कर्तव्यों के निर्वहन से नहीं रोक सकतीं। जवानों पर हमला होने के बावजूद उन्होंने संयम का परिचय दिया और घातक बल का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे मानव जीवन की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता दिखाई देती है।
त्रिपुरा में इससे पहले भी सीमा पार तस्करों द्वारा बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बलों पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 16 अक्टूबर 2017 को तस्करों के वाहन ने बीएसएफ की 145वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार मंडल को कुचल दिया था। गंभीर रूप से घायल मंडल का 20 अक्टूबर 2017 को निधन हो गया था।
इसी तरह 21 नवंबर 2019 को त्रिपुरा पुलिस के सब-इंस्पेक्टर दुर्गा कुमार ह्रांगखावल की भी ड्यूटी के दौरान कथित तस्करों द्वारा वाहन से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि संगठित सीमा पार तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर जोखिमों का सामना करना पड़ता है।
त्रिपुरा की बांग्लादेश के साथ 856 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। राज्य तीन ओर से बांग्लादेश से घिरा हुआ है, जिसके कारण यह अवैध घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। सीमा के अधिकांश हिस्सों में बाड़ लगाई जा चुकी है, ताकि तस्करी, अवैध आवाजाही और अन्य सीमा पार अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
