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पंचकूला में सहपाठी की पिटाई से घायल 6 वर्ष की बच्ची पीजीआईएमईआर से डिस्चार्ज, परिवार ने ली राहत की सांस

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चंडीगढ़, 4 नवंबर (आईएएनएस)। हरियाणा के पंचकूला में एक स्कूली साथी द्वारा बेरहमी से पीटे जाने के बाद 28 अक्टूबर को चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) में भर्ती कराई गई छह वर्ष की बच्ची को बुधवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बच्ची को बेहतर इलाज मिलने से उसके परिवार और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली है।

पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित एक स्कूल में विशेष जरूरतों वाली एक बच्ची के साथ तीसरी कक्षा के एक छात्र ने बेरहमी से मारपीट की। छात्र ने कई बार दीवार पर बच्ची का सिर दे मारा और जब वह खून से लथपथ होकर क्लासरूम के फर्श पर बेहोश पड़ी थी, तब भी उस पर ईंट से हमला किया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने कहा था कि वह बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और राज्य भर के स्कूलों में सुरक्षा का व्यापक ऑडिट कराएगी।

हालांकि, संवेदनशील और समान स्वास्थ्य सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए पीजीआईएमईआर ने बच्ची के परिवार पर कोई आर्थिक बोझ डाले बिना उसका इलाज किया। संस्थान ने उसके निजी कमरे का खर्च भी उठाया, ताकि इस मुश्किल समय में परिवार पूरी तरह से बच्ची के ठीक होने पर ध्यान दे सके।

पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, जो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान बच्ची का हाल-चाल जानने गए थे, ने उसके सफलतापूर्वक डिस्चार्ज होने पर खुशी और राहत जताई।

उन्होंने कहा, “इस बच्ची का सुरक्षित डिस्चार्ज होना हम सभी के लिए बहुत राहत और खुशी की बात है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हमें अंदर तक झकझोर दिया था। हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि उसे पूरी संवेदना, आराम और भरोसे के माहौल में बेहतरीन चिकित्सा देखभाल मिले।”

“मैं बच्ची के इलाज और ठीक होने की प्रक्रिया के दौरान हमारे डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों द्वारा दिखाए गए समर्पण और संवेदनशीलता की दिल से सराहना करता हूं।”

सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराने की अपनी प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए प्रो. लाल ने कहा, “पीजीआईएमईआर में हमारा दृढ़ विश्वास है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।”

“हम इस कठिन समय में बच्ची और उसके परिवार को हर संभव मदद देने के लिए प्रतिबद्ध थे। हम उसके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।”

बच्ची के इलाज में बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में एक समन्वित प्रयास किया गया, जिसमें ट्रॉमा सेंटर ने उसकी देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा ने उनके इलाज से जुड़े ट्रॉमा संबंधी पहलुओं का समन्वय किया, जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान जरूरी संस्थागत सहयोग और समन्वय सुनिश्चित किया।

प्रोफेसर महाजन ने कहा, “इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद एक छोटे बच्चे के इलाज के लिए न केवल क्लिनिकल विशेषज्ञता, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है।”

“हमारी टीम उन्हें जरूरी चिकित्सा देखभाल देने के साथ-साथ अस्पताल में उनके रहने के दौरान उनके आराम और भलाई का पूरा ध्यान रखने के लिए प्रतिबद्ध रही। हमें खुशी है कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और हम उम्मीद करते हैं कि वह जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आएंगी। पीजीआईएमईआर की विभिन्न टीमों के समन्वित प्रयासों ने यह सुनिश्चित किया कि उनकी देखभाल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहे।”