सऊदी अरब के विद्यार्थियों ने किया हिंदी में काव्य पाठ
भोपाल : 2 जुलाई/ विश्व रंग फाउंडेशन के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र एवं प्रवासी भारतीय शोध केंद्र रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा सऊदी अरब की...
हिंदी शोध की वैश्विक चेतना : रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय में “विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी...
भोपाल : 18 जुलाई/ रबींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, रायसेन द्वारा विश्व रंग फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित "विश्व रंग अंतरराष्ट्रीय हिंदी शोधार्थी सम्मेलन" का आयोजन...
‘लिखे जो खत तुझे’ से ‘ए भाई जरा देखके चलो…’ की रचना करने वाले...
नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। 'लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में, हजारों रंग के नजारे बन गए...' जैसे गीत गढ़ने वाले गोपालदास ‘नीरज’ खुद को बदकिस्मत मानते थे। ये सुन उनके प्रशंसक काफी हैरान होते हैं। आखिर सहज और सुंदर शब्दों में पिरोए गीत जो कइयों को प्रेरित करते हैं, उसे लिखने वाला शख्स भला कैसे खुद को बदकिस्मती का टैग दे सकता है!
“Fleeting Feet” काव्य संग्रह का विमोचन, डॉ. ममता एक्का की कविताओं में जीवन के...
भोपाल : 13 जुलाई / शासकीय हमीदिया महाविद्यालय, भोपाल की अंग्रेज़ी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. ममता एक्का द्वारा रचित काव्य संग्रह “Fleeting Feet”...
पीएम मोदी ने राज्यसभा के लिए मनोनीत चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को दी शुभकामनाएं
नई दिल्ली, 13 जुलाई (आईएएनएस)। देश के चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए चार हस्तियों को राज्यसभा के लिए नामित किया, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता उज्जवल निकम, केरल के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता सी. सदानंदन मास्टर, भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला और इतिहासकार मीनाक्षी जैन शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सभी मनोनीत सदस्यों को शुभकामनाएं दी हैं।
शब्दों से संवेदना गढ़ने वाली कवयित्री, हिंदी-अंग्रेजी साहित्य की सेतु निर्माता
नई दिल्ली, 12 जुलाई (आईएएनएस)। जब शब्द संवाद से कहीं बढ़कर संवेदना बन जाए, जब भाषा किसी एक सीमित परिधि की मोहताज न रहकर वैश्विक हो जाए और जब एक स्त्री अपनी लेखनी से दो संस्कृतियों के बीच पुल बना दे, तब वह नाम लिया जाता है सुनीता जैन का।
ओडिया भाषा को होगा लाभ, प्रसार के लिए एआई तकनीक का हो इस्तेमाल: धर्मेंद्र...
भुवनेश्वर, 12 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को एआई तकनीक पर जोर देते हुए कहा कि इसका सटीक प्रयोग करने से ओडिया साहित्य और भाषा का प्रसार होगा। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को ये बात रमादेवी महिला विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित ओडिया साहित्य की प्रख्यात हस्ती और सांस्कृतिक प्रतीक बिद्युत प्रभा देवी के शताब्दी समारोह में कही।
आधुनिक हिंदी साहित्य के स्तंभ ‘भीष्म साहनी’, ‘तमस’ में दिखा भारत-पाकिस्तान बंटवारे का दर्द
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभों की बात होती है तो भीष्म साहनी का जिक्र होना लाजिमी है। वे आधुनिक हिंदी साहित्य के एक प्रमुख स्तंभ थे, जिनकी रचनाएं सामाजिक, मानवीय मूल्यों और भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी को गहराई से बयां करती हैं। साहनी की लेखनी में मार्क्सवादी चिंतन और मानवतावादी दृष्टिकोण का संगम दिखाई देता है, जो उनकी कहानियों और उपन्यासों को कालजयी बनाता है।
साहित्य, संस्कृति और संवेदना के प्रतीक थे ‘कहानी के जादूगर’ चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
नई दिल्ली, 6 जुलाई (आईएएनएस)। साहित्य जगत के ध्रुव तारा चन्द्रधर शर्मा गुलेरी हिंदी के उन चमकते सितारों में से एक हैं, जिन्होंने अपने अल्प जीवनकाल में ही अमिट छाप छोड़ी। आधुनिक हिंदी साहित्य के 'द्विवेदी युग' के इस महान साहित्यकार ने अपनी रचनाओं विशेषकर कहानी 'उसने कहा था' के माध्यम से कथा साहित्य को नई दिशा दी। उनकी रचनाएं आज भी पाठकों के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ती हैं।
हिंदी रंगमंच की शान है असगर वजाहत का नाटक ‘जिन लाहौर नइ वेख्या ओ...
नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। जब भी भारत-पाकिस्तान विभाजन के दर्द और उसकी साहित्यिक अभिव्यक्ति की बात होती है, तो असगर वजाहत का नाम खुद ही जेहन में उभरता है। उनका नाटक ‘जिन लाहौर नइ वेख्या ओ जम्याइ नइ’ हिंदी रंगमंच का एक ऐसा मील का पत्थर है, जो 1947 के विभाजन की त्रासदी को न केवल गहरी संवेदनशीलता के साथ उकेरता है, बल्कि मानवता और सांप्रदायिक सौहार्द का एक शक्तिशाली संदेश भी देता है।










