Thursday, February 19, 2026
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साहित्य

यादों में दुष्यंत : ‘मसान’ की गुजरती रेल, शब्दों में थरथराता ‘दिल’, तड़प और...

नई दिल्ली, 29 दिसंबर (आईएएनएस)। साल 2015 में बॉलीवुड की फिल्म 'मसान' रिलीज हुई। बनारस, आज के युवाओं के लिए वाराणसी, के बैकड्रॉप पर सेट इस फिल्म के हर संवाद, सीन और गाने लोगों के कानों के रास्ते दिल तक पहुंच गए। एक गाना है, 'तू किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं।' यह गाना दुष्यंत कुमार की गजल से लिया गया, जिसने हर उम्र को अपना दीवाना बना लिया।

सही मायने में भारतीय संस्कृति को अपनाना ही आधुनिकता है

डॉ कपिल भार्गव आधुनिक युग में ‘आधुनिकता’ को प्रायः पाश्चात्य जीवन-शैली, उपभोगवाद और तकनीकी प्रगति से जोड़ दिया जाता है। परंतु भारतीय दृष्टि से आधुनिकता...

विनीता चौबे के नए संग्रह ‘परछाईं’ का गरिमामय लोकार्पण

भोपाल : 25 दिसंबर/ आईसेक्ट पब्लिकेशन एवं वनमाली सृजन पीठ के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के सभागार में वरिष्ठ...

जयंती विशेष: ‘उल्टे चश्मे’ से दुनिया देखने वाले तारक मेहता, जिनकी रचनाएं गुदगुदाती हैं

मुंबई, 25 दिसंबर (आईएएनएस)। गुजराती साहित्य के प्रसिद्ध हास्यकार, कॉलमनिस्ट और नाटककार और एक ऐसे साहित्यकार, जो दुनिया को सीधे नहीं बल्कि उल्टे चश्मे से देखते थे। जी हां, बात हो रही है तारक जनुभाई मेहता की, जिनकी रचनाएं पाठकों, दर्शकों को आज भी खिलखिलाकर हंसने पर मजबूर करती हैं।

‘मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तीकरण’ किताब का उपराष्ट्रपति ने किया विमोचन

नई दिल्ली, 24 दिसंबर (आईएएनएस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हिमाचल के राज्यसभा सांसद प्रोफेसर (डॉ.) सिकंदर कुमार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 11 साल के कार्यकाल के दौरान आर्थिक क्षेत्र में प्राप्त की गई उपलब्धियों पर लिखी पुस्तक 'मोदी युग में भारत का आर्थिक सशक्तीकरण' का बुधवार को उपराष्ट्रपति एन्क्लेव, नई दिल्ली में विमोचन किया। 

जैनेंद्र कुमार : भारत का मानचित्र बनाकर लिए थे ‘फेरे’, ठुकरा दिया था ‘हिंदी...

नई दिल्ली, 23 दिसंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के मनोवैज्ञानिक कथाकार जैनेंद्र कुमार की लेखनी ने हिंदी उपन्यास को नई दिशा दी। मनोविश्लेषण की गहराई से पात्रों के अंतर्मन को उन्होंने कलम के साथ कोरे कागज पर उकेरा। नई विचारधारा और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण कुछ आलोचकों ने उन्हें विवादास्पद माना, लेकिन कई साहित्यकारों ने उन्हें 'मानव मन के मसीहा' या 'नए युग का प्रवर्तक' भी कहा।

‘नौकर की कमीज’ के रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, सीएम विष्णु देव साय...

रायपुर, 23 दिसंबर (आईएएनएस)। 'जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे, मैं उनसे मिलने उनके पास चला जाऊंगा', कविता लिखने वाले कवि और हिंदी साहित्य के वरिष्ठ और प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया है। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज एम्स रायपुर में जारी था।

जयंती विशेष : ‘हम घिरे हैं गिरे नहीं’ बताने वाले समकालीन शब्दकार

नई दिल्ली, 21 दिसंबर (आईएएनएस)। हिंदी साहित्य के समकालीन कवियों में पंकज सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी कविताएं संघर्ष, विद्रोह और मानवीय संवेदनाओं से भरी हुई हैं। 'हम घिरे हैं गिरे नहीं' जैसी पंक्तियां उनके साहसी और बेबाक स्वभाव को दर्शाती हैं।

‘विश्व रंग वार्ता’ में विश्वरंग के ऐतिहासिक आयोजनों की साझा हुई यात्रा, अनुभव और...

भोपाल : 20 दिसंबर/ ‘विश्व रंग श्रीलंका’, ‘आरंभ – मुंबई’ और ‘विश्व रंग भोपाल 2025’ जैसे ऐतिहासिक आयोजनों की अपार सफलता और विश्वरंग के...

‘चार्ल्स डिकेन्स’ की एक किताब जिसने क्रिसमस को इंसानियत का त्योहार बना डाला

नई दिल्ली, 18 दिसंबर (आईएएनएस)। शांति, प्यार और खुशियों का त्योहार क्रिसमस करीब है। ईसा मसीह को समर्पित इस दिन पर विशेष इंतजाम किए जाते हैं। वर्षों पहले इसमें खुशियों को एड करने की एक कोशिश चार्ल्स डिकेन्स ने की। एक ऐसी कहानी रची जिसने लोगों की सोच बदली और उस सोच ने इस पर्व को मनाने के तरीके को काफी हद तक बदल डाला।

खरी बात