पूर्व विधायक किशोर समरीते ने राष्ट्रपति को भेजा पत्र, नक्सल ऑपरेशन, आदिवासी हत्याओं और माफिया राज की जांच की मांग

0
35

भोपाल : 27 नवंबर/ बालाघाट की लांजी के पूर्व विधायक और संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष किशोर समरीते ने भारत में नक्सलवाद के नाम पर आदिवासियों की कथित हत्याओं, मध्यप्रदेश के बालाघाट–सिवनी जिलों में माफिया राज तथा पुलिस की गैरकानूनी कार्रवाइयों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति को विस्तृत पत्र भेजा है। उन्होंने इन घटनाओं की न्यायिक व स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

“हिड़मा मड़ावी सहित हजारों आदिवासियों की हत्या की पारदर्शी जांच हो”

समरीते ने पत्र में आरोप लगाया कि हंसदेव अरण्य क्षेत्र में जंगलों की कटाई का विरोध कर रहे हिड़मा मड़ावी की हत्या “कॉरपोरेट दबाव” में कराई गई, लेकिन एनआईए और केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मामले की कोई जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के नाम पर “हजारों आदिवासियों की फर्जी मुठभेड़ों में हत्या की परंपरा” ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर जैसी मानसिकता को दर्शाती है।

ऑपरेशन ग्रीन हंट पर सवाल

पूर्व विधायक ने 2014 से चल रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट के दौरान पुलिस द्वारा सर्वोच्च न्यायालय और गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के उल्लंघन के आरोप लगाए।
उनका कहना है कि “आदिवासी राष्ट्रपति, आदिवासी मुख्यमंत्री और आदिवासी राज्यपाल होने के बावजूद आदिवासियों की हत्याएँ नहीं रुक रहीं।”

आंकड़ों का हवाला देकर सरकार की नाकामी बताई

समरीते ने पत्र में 2023–2025 के बीच हुई आत्महत्याओं, महिलाओं–बच्चियों पर अपराध, तथा पुलिस हिरासत में मौतों के आंकड़े देते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के कारण युवक शहरों में यूट्यूबर और जंगलों में नक्सली बनने को मजबूर हैं।

“बालाघाट–सिवनी में पुलिस और माफिया गठजोड़ सक्रिय”

समरीते ने दावा किया कि—

– 2018 से 2025 के बीच 45 पुलिसकर्मियों को निर्दोष आदिवासियों को नक्सली बताकर मारने के बदले आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नति दी गई, जिसकी सीबीआई जांच कराए जाने की मांग उन्होंने की।
– बोलेगांव (लांजी) में 700 करोड़ की कथित बरामदगी में अनियमितताएँ

उन्होंने कहा कि डबलमनी मामले में पुलिस अधिकारियों ने बड़ी नकदी बरामद की, परंतु न तो ज़ब्ती की कार्रवाई हुई और न ही विभागीय जांच। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों को दोबारा पदस्थापना दे दी गई।

सिवनी के पांडिया छपारा हत्याकांड में कार्रवाई नहीं

उन्होंने आरोप लगाया कि रेत और शराब माफिया द्वारा विकास पटले की गोली मारकर हत्या के बाद भी पुलिस न तो हथियार बरामद कर पाई और न ही आरोपियों को गिरफ्तार।

निरीक्षक आशीष शर्मा की शहादत संदिग्ध बताते हुए जांच की मांग

उन्होंने आरोप लगाया कि घटना की एनआईए या न्यायिक जांच नहीं कराई गई, जबकि शव को “भावनात्मक प्रदर्शन” की तरह शहर में घुमाया गया।

“नक्सली क्षेत्र में 5 करोड़ आदिवासियों की लोकतांत्रिक भागीदारी दांव पर”

समरीते ने कहा कि नक्सलवाद अब 9 राज्यों के 69 लोकसभा क्षेत्रों में फैला है। उनका तर्क है कि इन क्षेत्रों में आदिवासी परिवारों की बड़ी संख्या लोकतंत्र का हिस्सा है, ऐसे में संघर्ष का सैन्य समाधान लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करेगा।

चीन-पीओके मसले और महानगरों में गैंगस्टर गतिविधियों पर भी सवाल

उन्होंने पत्र में भारत की सुरक्षा चुनौतियों, पीओके–आक्साई चीन पर सरकार की नीति, और दिल्ली–मुंबई जैसे महानगरों में बढ़ते गैंगस्टर नेटवर्क पर भी चिंता जताई।

राष्ट्रपति से उठाई गई मुख्य माँगें

किशोर समरीते ने अपने पत्र में निम्न मांगें रखी हैं—

– नक्सलवाद के नाम पर आदिवासियों की हत्याओं की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच

– बालाघाट और सिवनी को माफिया-मुक्त घोषित करने की तत्काल प्रक्रिया

– दोनों जिलों में शराब–रेत कारोबारियों को जारी किए गए रिवॉल्वर–पिस्टल लाइसेंसों की जांच

– फर्जी मुठभेड़ों, पदोन्नतियों और पुलिस–माफिया गठजोड़ की सीबीआई/एनआईए जांच

– केंद्र सरकार द्वारा आदिवासियों को “नक्सली” करार देकर की जा रही कार्रवाइयों पर रोक