अपनी ही पार्टी के विधायक के निशाने पर आए सीएम विजयन के दामाद

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तिरुवनंतपुरम, 25 जून (आईएएनएस)। केरल में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दामाद और पर्यटन राज्य मंत्री पीए मोहम्मद रियास अपनी ही पार्टी के विधायक के निशाने पर आ गए हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक कडकमपल्ली सुरेंद्रन ने रियास के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा है।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में पिनाराई विजयन के नेतृत्व में सत्तारूढ़ माकपा नीत वाम दल को राज्य की 20 में से केवल एक सीट मिली। इसके बाद से पिनाराई विजयन पार्टी के भीतर और सहयोगी दल, दोनों से आलोचना झेल रहे हैं।

बता दें कि सुरेंद्रन और पहली बार विधायक बने रियास के बीच संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं। यह कुछ समय पहले विधानसभा में भी देखने को मिला था। सोमवार को यह बात फिर सामने आई, जब सुरेंद्रन ने पर्यटन विभाग के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए।

हालांकि, अपने जवाब में रियास ने सुरेंद्रन की ओर से उठाए गए मुद्दे को दरकिनार कर दिया।

जून 2020 में विजयन की बेटी वीणा विजयन से शादी करने के बाद पार्टी में रियास का दर्जा काफी बढ़ गया। उन्होंने माकपा के गढ़ बेपोर निर्वाचन क्षेत्र से 2021 का विधानसभा चुनाव भी जीता। जब कैबिनेट का गठन हुआ, तो उन्हें लोक निर्माण और पर्यटन राज्य मंत्री बनाया गया। इससे लोग नाराज हो गए।

सरकार में प्रमुख पद पर आसीन होने के बाद नाराजगी तब और बढ़ गई जब उन्हें माकपा की केरल इकाई के 17 सदस्यीय राज्य सचिवालय में शामिल कर लिया गया।

इसके बाद से पार्टी में बहुत से लोग खुश नहीं थे, जब पार्टी के दो विधायकों समेत तीन शीर्ष नेताओं को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा गया, तो अटकलें शुरू हो गईं।

कई लोगों का मानना है कि यह विजयन की एक चाल थी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि वे जीत गए तो वे लोकसभा में जाएंगे और यदि वे हार गए तो उन्हें समर्थन नहीं मिलेगा। स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने के कारण विजयन को अब एक उत्तराधिकारी की तलाश है।

विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने अभी कुछ दिन पहले ही विधानसभा में कहा था कि हालात यहां तक ​​पहुंच गए हैं कि जब विजयन सदन में घिर जाते हैं तो उन्हें केवल रियास का समर्थन मिलता है।

माकपा की जिला समितियों की बैठकें चल रही हैं, जिसमें से 14 में लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के लिए विजयन की आलोचना हुई।

राष्ट्रीय नेतृत्व ने घोषणा की है कि इस महीने के अंत में वे इस हार का विश्लेषण करेंगे। लेकिन यह देखना अभी बाकी है कि क्या बैठक में रियास के मुद्दे पर चर्चा होगी? यदि ऐसा होता है, तो इससे ससुर और दामाद दोनों को भारी नुकसान होगा।