Sunday, August 23, 2026
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शब्बीर शाह की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए से मांगा जवाब, तीन सप्ताह की मोहलत दी

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नई दिल्ली, 13 जनवरी (आईएएनएस)। टेरर-फंडिंग मामले में आरोपी कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। इस मामले की सुनवाई 10 फरवरी को होगी।

एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस मामले में नए तथ्य सामने आए हैं और वह शब्बीर अहमद शाह के हलफनामे पर एक विस्तृत जवाब दाखिल करेगी। कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार कर लिया।

74 साल के शब्बीर शाह ने अपनी ज्यादा उम्र और साढ़े छह साल से ज्यादा समय तक जेल में रहने का हवाला देते हुए जमानत मांगी है।

शाह की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ एक भाषण पर आधारित है, जिसे कोर्ट के सामने कई बार पेश किया जा चुका है। शाह पहले ही काफी समय हिरासत में बिता चुके हैं और लगातार एफआईआर के जरिए बार-बार गिरफ्तारी का खतरा है।

इस याचिका का विरोध करते हुए एनआईए के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि शब्बीर शाह को इस मामले में जून 2019 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि वह पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय के एक मामले में हिरासत में थे। उन्होंने आरोप लगाया कि शब्बीर अहमद शाह और अन्य लोग प्रशासन को पंगु बनाने के मकसद से सड़क पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों को फंड देने में शामिल थे।

लूथरा ने कोर्ट को यह भी बताया कि गवाहों ने कहा है कि शब्बीर शाह ने पाकिस्तान में मेडिकल सीटों के लिए छात्रों की सिफारिश की थी, जहां कश्मीरी छात्रों के लिए सीटें आरक्षित हैं। उन्होंने बेंच को बताया कि कुल 248 गवाहों में से अब तक 34 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और 16 मार्च 2022 को आरोप तय किए गए थे।

एनआईए के अनुसार, हर महीने चार से पांच गवाहों से पूछताछ की जा रही है।

दलीलों का जवाब देते हुए सीनियर वकील कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि शाह ने 1996 में ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस (एपीएचसी) छोड़ दी थी और अपना खुद का स्वतंत्र समूह बनाया था। उन्होंने दलील दी कि आरोप मुख्य रूप से एपीएचसी से संबंधित हैं, न कि शब्बीर शाह से।

उन्होंने ट्रायल की गति पर भी सवाल उठाया, यह कहते हुए कि गवाहों की संख्या बढ़ाकर 290 करने के बाद भी, आठ सालों में सिर्फ 30 गवाहों से पूछताछ की गई है, इसलिए शाह को जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

शब्बीर शाह ने पिछले साल 12 जून को दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। एनआईए ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में सबूतों की रिकॉर्डिंग अभी चल रही है।