नई दिल्ली, 7 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (एनएसएफ) कॉन्क्लेव 2026 की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में युवा मामले और खेल राज्यमंत्री रक्षा खडसे, मंत्रालय और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एसएआई) के वरिष्ठ अधिकारी और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स (एनएसएफ) के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कॉन्क्लेव में खेल प्रशासन को मजबूत करने, खिलाड़ियों के कल्याण को बेहतर बनाने और आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भारत की तैयारियों की समीक्षा करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस कॉन्क्लेव में ‘नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025’ के तहत नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन्स के नियमों के पालन की स्थिति, स्पोर्ट्स संस्थाओं में अच्छे गवर्नेंस के तरीकों और एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स 2028 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एनएसएफ की तैयारियों पर विस्तार से प्रेजेंटेशन दिए गए।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने जोर दिया कि स्पोर्ट्स इकोसिस्टम से जुड़े हर स्टेकहोल्डर के लिए एथलीट्स का हित और भलाई सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह हमारी जिम्मेदारी है कि यह पक्का किया जाए कि किसी भी एथलीट के साथ कभी अन्याय न हो। अन्याय कई तरह से हो सकता है और जहां भी ऐसी स्थिति पैदा हो…।”
एथलीट सिलेक्शन प्रोसेस में पूरी पारदर्शिता की मांग करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिलेक्शन ट्रायल्स निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से होने चाहिए। डॉ. मंडाविया ने कहा, “ओपन सिलेक्शन ट्रायल्स की रिकॉर्डिंग ऑब्ज़र्वर्स की मौजूदगी में कैमरे पर होनी चाहिए। सिलेक्शन प्रोसेस में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।”
डॉ. मंडाविया ने कहा, “प्रधानमंत्री ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि एथलीट्स को खेल के मैदान में बनाए रखा जाए और देश में एक मजबूत लीग कल्चर विकसित किया जाए। हर नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन को पूरे साल एथलीट्स के लिए ज्यादा कॉम्पिटिटिव मौके बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।”
केंद्रीय मंत्री ने भारतीय खेलों से डोपिंग को खत्म करने के लिए एक व्यापक रणनीति की जरूरत पर भी जोर दिया। मौजूदा सिस्टम को मजबूत करने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि सरकार एंटी-डोपिंग सिस्टम को और असरदार बनाने के लिए बदलावों पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, “हमें मिलकर डोपिंग की समस्या से निपटना होगा। सिर्फ खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करना काफी नहीं है। पूरी चेन बनाने वालों और सप्लायर से लेकर मदद करने वालों और इस्तेमाल करने वालों तक की पहचान की जानी चाहिए और एक पारदर्शी और मजबूत सिस्टम के जरिए उनसे निपटा जाना चाहिए। तभी हम खेलों से डोपिंग को पूरी तरह खत्म कर पाएंगे।”
डॉ. मंडाविया ने एक मजबूत घरेलू कोचिंग सिस्टम बनाने और विदेशी कोचों पर ज्यादा निर्भरता कम करने की अहमियत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हमें अच्छे भारतीय कोचों का एक पूल तैयार करने की ज़रूरत है। खिलाड़ियों को ट्रेनिंग देने के साथ-साथ, हमें अपने कोचों को भी बेहतरीन मौके और इंटरनेशनल अनुभव देकर उनकी ट्रेनिंग में बराबर निवेश करना होगा। एक अच्छी तरह से ट्रेंड कोच ही आखिर में देश के लिए वर्ल्ड-क्लास खिलाड़ी तैयार करेगा।”
केंद्रीय खेल मंत्री ने नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन के साथ मिलकर काम करने के लिए मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, ताकि गवर्नेंस के स्टैंडर्ड को मजबूत किया जा सके, नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 का पालन सुनिश्चित किया जा सके और एशियन गेम्स 2026, लॉस एंजिल्स ओलंपिक्स 2028 और कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए भारत की तैयारियों को बेहतर बनाया जा सके।

