अजमेर, 24 अगस्त (आईएएनएस)। ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह अजमेर शरीफ स्थित ऐतिहासिक महफिल खाना में सोमवार को 18वें अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। सूफियाना रंग, आध्यात्मिक वातावरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच शुरू हुए इस पांच दिवसीय महोत्सव के पहले दिन ही 50 हजार से अधिक जायरीन और अकीदतमंदों ने शिरकत की। आयोजकों के अनुसार, पिछले 18 वर्षों के इतिहास में यह महोत्सव सबसे बड़ी सहभागिताओं में से एक रहा।
महोत्सव में भारत समेत विभिन्न देशों के 43 देशी-विदेशी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। आयोजन का नेतृत्व चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती, फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. अजीम एस. मेमन, फेस्टिवल एडवाइजर एम्बेसडर डॉ. फहीम एफ. खान और कोऑर्डिनेटर उस्ताद महमूद शेख कर रहे हैं।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत पवित्र कुरान शरीफ की तिलावत और किरात से हुई, जिसे सैयद फुजैल चिश्ती ने प्रस्तुत किया। इसके बाद अंजुमन-ए-खुद्दाम-ए-ख्वाजा के सचिव सैयद कलीमुद्दीन चिश्ती ने दुआ और आशीर्वचनों के साथ कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
हैदराबाद से आए अनिल चौहान ने नात-ए-रसूल पेश कर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया। सूफियाना कलाम और नात की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर को रूहानी माहौल में रंग दिया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद (एनसीपीयूएल), नई दिल्ली के प्रोजेक्ट असिस्टेंट मोहम्मद कासिम ने उर्दू भाषा और कैलिग्राफी की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में पारंपरिक कला और उर्दू लिपि की खूबसूरती का संरक्षण बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम में चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने सभी अतिथियों, कलाकारों और विद्वानों का स्वागत एवं आभार व्यक्त किया। इसके बाद इंदौर के प्रसिद्ध कलाकार आफताब कादरी ने महफिल-ए-समा में सूफी कलाम पेश कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा, ”सूफी रंग कोई प्रस्तुति नहीं, बल्कि रंगों, रेखाओं, हुरूफ और सुरों में अदा की गई एक दुआ है। जब हजारों तलबगार ख्वाजा गरीब नवाज के आंगन में पहुंचते हैं तो वे केवल दर्शक बनकर नहीं आते, बल्कि एक साझा आध्यात्मिक यात्रा के सहभागी बनते हैं।”
उन्होंने कहा कि कैलिग्राफी की हर रेखा और समा का हर सुर वही संदेश देता है, जो अजमेर शरीफ सदियों से दुनिया को देता आया है, “सबके लिए मोहब्बत और किसी के लिए द्वेष नहीं।”
महोत्सव में इस वर्ष दो दुर्लभ कुरान शरीफ विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनमें से एक कुरान शरीफ आब-ए-जमजम, गोंद और केसर के प्राकृतिक मिश्रण से लिखा गया है, जबकि दूसरा पूरी तरह हाथ से सिला हुआ है।
श्रद्धालु और पर्यटक इन दुर्लभ धार्मिक धरोहरों के दीदार के लिए बड़ी संख्या में महफिल खाना पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही महोत्सव में लाइव कैलिग्राफी वर्कशॉप और लाइव कालीन आर्ट पेंटिंग का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसे दर्शकों का भरपूर उत्साह मिल रहा है।
18वां अंतर्राष्ट्रीय सूफी रंग महोत्सव 26 अगस्त तक दरगाह अजमेर शरीफ परिसर में आयोजित किया जाएगा। महोत्सव के दौरान प्रतिदिन कैलिग्राफी सत्र, कला प्रदर्शनियां, दुर्लभ पांडुलिपियों के प्रदर्शन और शाम को महफिल-ए-समा का आयोजन होगा।
आयोजकों ने बताया कि यह महोत्सव सभी धर्मों, राष्ट्रीयता और समुदायों के लोगों के लिए खुला है। इसका उद्देश्य अजमेर शरीफ की सदियों पुरानी सूफी परंपरा, कला, संस्कृति और प्रेम, भाईचारा तथा मानवता के संदेश को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना है।

