मुंबई, 13 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को मुंबई स्थित एशियाटिक सोसायटी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सोसायटी की प्राचीन ग्रंथ संपदा, अभिलेखीय संग्रह और सिक्कों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी ‘श्री गणेश ज्ञानारती’ का अवलोकन किया। दौरे को लेकर सोसायटी के अध्यक्ष विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि गृह मंत्री ने पूरे काम को गंभीरता से देखा-समझा और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रकाश को विश्व में फैलाने के लिए काम करते रहने का आशीर्वाद दिया।
विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, “गृह मंत्री ने अपनी रुचि के अनुसार सोसायटी के कामकाज में आ रही दिक्कतों को दूर करने को लेकर चर्चा की। जब मैं उनसे मिला था, तो मैंने स्वाभाविक रूप से उनसे कहा था कि आप एक बार आकर खुद अपनी आंखों से देखिए। उन्होंने इस निमंत्रण को सहर्ष स्वीकार किया, समय निकाला और पूरे काम को बड़ी गंभीरता से देखा-समझा।”
उन्होंने बताया, “उनके स्वागत में हमने अपनी प्राचीन ग्रंथ संपदा, कुछ अभिलेखीय संग्रह और हमारे पास मौजूद सिक्कों की एक छोटी प्रदर्शनी विशेष रूप से गृह मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के लिए लगाई थी। ये प्रदर्शनी केवल उनके लिए थी और सोमवार को गणेश जी आ रहे हैं तो हमने इसे ‘श्री गणेश ज्ञानारती’ नाम दिया था। यह आम जनता के लिए नहीं थी।”
एशियाटिक सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा कि आज सबसे बड़ी खुशी की बात यह है कि उन्होंने हम सभी को आशीर्वाद दिया और कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रकाश लंबे समय तक विश्व में फैले, इसलिए आप लोग काम करते रहिए।
विनय सहस्रबुद्धे ने आगे कहा, “अपने अध्ययन और अंतर्दृष्टि के आधार पर उन्होंने (गृहमंत्री) इस बात पर भी टिप्पणी की कि किस तरह ब्रिटिश शासन के दौरान इंडोलॉजी को राजनीति के एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने पूरे मनोयोग से हमें हर तरह का सहयोग देने का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिक्षा मंत्री भी आए थे, इसलिए हमें पूरी उम्मीद है कि इस संस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में हमारे प्रयास सफल होंगे।”
एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए एशियाटिक सोसायटी के अध्यक्ष ने कहा, “बिल्कुल, यह निरंतर करने वाला काम है। चाहे आप नासिक का उदाहरण लें, कोल्हापुर, रत्नागिरी या नागपुर का ले लें, ऐसे कई पुराने शहर हैं जहां पुराने बाड़े, बस्तियां हैं और जहां ऐसे दस्तावेज, प्राचीन ग्रंथ जिन्हें हम पोथी कहते हैं और पूर्वजों द्वारा बनाए गए कुछ चित्र मौजूद हैं।”
उन्होंने कहा, “इन सभी को संकलित करना चाहिए, क्योंकि नई पीढ़ी, इच्छा होते हुए भी अपने घराने की इन धरोहरों को कितना सुरक्षित रख पाएगी? इसके लिए एक आश्रय स्थल होना चाहिए और उसका जवाब होना चाहिए, द एशियाटिक सोसायटी ऑफ मुंबई।”
विनय सहस्रबुद्धे ने कहा, “उस दृष्टि से यह पूरा परिसर हमारे नियंत्रण में आए, इस दिशा में भी आज महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने हमें आश्वस्त किया है। हमें पूरी आशा है कि उनके दिखाए हुए रास्ते पर हम तेज गति से आगे बढ़ पाएंगे।”
डिजिटाइजेशन पर उन्होंने बताया, “हमारे यहां लगभग ढाई लाख किताबें और अन्य दस्तावेज हैं। कार्यभार संभालने के बाद पिछले ढाई महीने में हमने जो जानकारी ली है, उसके मुताबिक 50 फीसदी से अधिक किताबों का डिजिटाइजेशन हो चुका है। एक समय जब सुधीर मुनगंटीवार यहां मंत्री थे, तब उन्होंने इसके लिए पांच करोड़ की राशि दी थी। मुख्यमंत्री ने अभी कहा कि पैसे की कमी नहीं होने देंगे और अधिक राशि भी मिलेगी, इस पर हम विचार करेंगे।”
