नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय नेत्र विज्ञान अनुसंधान सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। सेना के डॉक्टर्स के लिए यह बड़ा अवसर है। यहां नेत्र चिकित्सा से जुड़े राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह बड़ा आयोजन 09 और 10 मई को दिल्ली कैंट के मानेकशॉ सेंटर में होगा। सम्मेलन का उद्घाटन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ करेंगे।
इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तीनों सेनाओं (वायुसेना, नौसेना व थलसेना) के प्रमुख और रक्षा सचिव भी मौजूद रहेंगे। यह सम्मेलन आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) और ऑल इंडिया ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी मिलकर आयोजित कर रहे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसमें देशभर से लगभग 200 प्रसिद्ध नेत्र रोग विशेषज्ञ और सेना के डॉक्टर शामिल होंगे।
यहां इस सम्मेलन में आंखों की बीमारियों के इलाज, नई तकनीकों और आधुनिक शोध पर चर्चा होगी। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि देश के कई बड़े मेडिकल संस्थानों इसमें शामिल हो रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, एल वी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट और शंकर नेत्रालय के विशेषज्ञ भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन की खास बात यह है कि इसमें विदेशों के दो प्रसिद्ध विशेषज्ञ भी आ रहे हैं। प्रोफेसर हरमिंदर सिंह दुआ आंखों की गंभीर चोटों पर अपने शोध और ‘दुआ लेयर’ की खोज के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं। वहीं डॉ. कॉलिन सियांग हुई टैन रेटिना जांच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेत्र परीक्षण तकनीकों के विशेषज्ञ हैं।
माना जा रहा है यह आयोजन भारतीय सेना के युवा डॉक्टरों के लिए सीखने और अपने शोध प्रस्तुत करने का बड़ा अवसर होगा। इस के साथ ही इस आयोजन से भारतीय सेना और नागरिक चिकित्सा संस्थानों के बीच सहयोग भी और मजबूत होगा। यही कारण है कि यह सम्मेलन भारत में आधुनिक नेत्र चिकित्सा और शोध को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
–आईएएनएस
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