नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। एशियन पैरा गेम्स 2026 में पदक जीतकर जापान से लौटे पैरा-एथलीट्स नवदीप सिंह, अजीत यादव और दिलीप गावित का भारत पहुंचने पर जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान खिलाड़ियों ने अपने अनुभव साझा किए।
पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा की एफ40/एफ41 श्रेणी में कांस्य पदक जीतने वाले नवदीप सिंह ने भारत लौटने पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि पदक जीतने के बाद उन्हें काफी अच्छा लग रहा है। साल के अंत में अब वह आराम करने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने जापान में खेलों के आयोजन और प्रबंधन को भारत में होने वाली प्रतियोगिताओं से अलग बताया।
नवदीप ने कहा, “जापान में प्रबंधन थोड़ा अलग था। हमें एक अलग तरीके से खेलों में हिस्सा लेने की आदत है। आमतौर पर पूरा गेम्स विलेज होता है, लेकिन इस बार व्यवस्था काफी अलग थी। खिलाड़ियों के ठहरने और ट्रेनिंग के स्थान अलग-अलग थे। ट्रेनिंग के लिए रोजाना करीब 40 मिनट दूर जाना पड़ता था। होटल में जिम की सुविधा भी नहीं थी। इन परिस्थितियों को समझने में थोड़ा समय लगा।”
उन्होंने कहा कि अब वह दीपावली मनाएंगे और परिवार के साथ त्योहार का आनंद लेंगे। नवदीप ने देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं।
पुरुषों की भाला फेंक एफ46 स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले अजीत यादव ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि पदक जीतने के बाद स्वागत और सम्मान समारोह ने उनकी खुशी को और बढ़ा दिया।
अजीत ने कहा, “जीतने के बाद बहुत मजा आया। जिस तरह से स्वागत हुआ, ढोल-नगाड़े बजे और सम्मान समारोह हुआ, उससे खुशी दोगुनी हो गई। जापान में मेरा अनुभव शानदार रहा। इससे पहले भी मैं दो बार टोक्यो पैरालंपिक और एक बार विश्व चैंपियनशिप में जापान में खेल चुका हूं। इस बार वहां मेरा तीसरा टूर्नामेंट था और मैंने रजत पदक जीता।”
उन्होंने बताया कि भाला फेंक का मुकाबला काफी रोमांचक रहा। आखिरी थ्रो में उनके प्रतिद्वंद्वी ने मामूली अंतर से स्वर्ण पदक हासिल किया। अजीत के मुताबिक, बड़े मुकाबलों में मानसिक और मनोवैज्ञानिक चुनौतियां खेल का हिस्सा होती हैं। उन्होंने कहा कि चुनौतियां ही खेल को रोमांचक बनाती हैं और खिलाड़ियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती हैं।
पुरुषों की 100 मीटर और 400 मीटर (टी47 स्पर्धा) में देश के लिए दो गोल्ड जीतने वाले दिलीप गावित ने कहा, “मुझे बहुत खुशी भी हो रही है और दुख भी। खुशी इसलिए क्योंकि हमने कुछ हासिल किया है, लेकिन दुख इसलिए क्योंकि जब भी एथलीट दिल्ली या हरियाणा जैसी जगहों पर जाते हैं तो वहां ढोल-नगाड़ों और जश्न के साथ उनका स्वागत किया जाता है। लेकिन यहां, हमारा स्वागत करने के लिए सरकार या खेल प्राधिकरण का कोई प्रतिनिधि नहीं आया। कोई भी नहीं आया।”
