नई दिल्ली, 3 नवंबर (आईएएनएस)। मौलाना शाजिद रशीदी ने पुजारियों को लेकर नेहा बोरा की टिप्पणी, पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण का विवाद, प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक को थप्पड़ मारने की घटना, आजम खान की गिरफ्तारी और धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखते हुए धार्मिक नेताओं की जवाबदेही, लोकतंत्र में सवाल पूछने के अधिकार और राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल उठाए।
नेहा बोरा की पुजारियों पर टिप्पणी के बारे में मौलाना शाजिद रशीदी ने कहा कि पुजारियों और धार्मिक गुरुओं से जुड़े कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें उन पर गलत गतिविधियों के आरोप लगे। आसाराम बापू, राम रहीम जैसे नामों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के करोड़ों अनुयायी हैं और कुछ लोग आज भी उनके प्रति श्रद्धा रखते हैं। गलत चीज को गलत मानना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेहा बोरा की जिन बातों को वह गलत मानते हैं, उन पर भी पहले अपनी राय रख चुके हैं।
संन्यास की परंपरा पर उन्होंने कहा कि इस्लाम में संन्यास को गलत माना गया है, क्योंकि इंसान की प्राकृतिक जरूरतें होती हैं। संन्यास लेने के बाद कुछ लोग गलत गतिविधियों में शामिल होते हैं, जिससे धर्म और भगवा वस्त्रों की छवि प्रभावित होती है।
पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण के विवाद और 6 दिसंबर को एनएच-34 जाम करने की धमकी पर रशीदी ने कहा कि बाबरी मस्जिद बंगाल में क्यों बनाई जाए? उन्होंने हुमायूं कबीर से अपील की कि अयोध्या में सरकार की ओर से अदालत के आदेश पर मस्जिद के लिए जो जमीन दी गई है, वहीं निर्माण की शुरुआत की जाए। रशीदी ने कहा कि वह हुमायूं के साथ उस जगह जाकर मस्जिद की नींव रखने के लिए तैयार हैं। निर्धारित जमीन का इस्तेमाल करना बेहतर होगा और इस तरह के विवादों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
प्रयागराज में यूजीसी कानून पर सवाल पूछने वाले युवक को थप्पड़ मारने की घटना पर मौलाना ने इसे तानाशाही बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार से सवाल पूछने और असहमति जताने का संवैधानिक अधिकार है। यूजीसी कानून के कारण भाजपा से सवर्ण हिंदुओं की दूरी बढ़ती दिखाई दे रही है। सवाल पूछने पर हिंसा करना गलत है और इस मामले में कार्रवाई होनी चाहिए।
आजम खान की जमानत के बाद ईडी की ओर से गिरफ्तारी पर रशीदी ने सवाल उठाए। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी आरोप लगाया कि उसने आजम खान के कानूनी मामलों को गंभीरता से नहीं उठाया। रशीदी ने अखिलेश यादव की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सपा नेतृत्व आजम खान की रिहाई के लिए पर्याप्त प्रयास कर रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि आजम खान बड़े नेता हैं और यदि उनकी यूनिवर्सिटी में कोई गड़बड़ी हुई है तो उस पर बैठकर बातचीत की जा सकती है। उन्होंने आजम खान को रिहा करने और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की।
धीरेंद्र शास्त्री के भगवान कृष्ण और महिलाओं को लेकर दिए गए बयानों पर रशीदी ने तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने शास्त्री की टिप्पणियों को अनुचित बताते हुए कहा कि धार्मिक आस्थाओं का अपमान नहीं होना चाहिए। उन्होंने उनके पुराने बयान का भी उल्लेख किया और कहा कि बाद में सफाई देने से कही गई बात का प्रभाव खत्म नहीं होता। रशीदी ने धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक कथाओं के लिए भारी रकम ली जाती है और लोगों को अंधविश्वास की ओर ले जाया जाता है।
