लखनऊ, 30 मार्च (आईएएनएस)। बैंक धोखाधड़ी के एक लंबे समय से लंबित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के इलाहाबाद स्थित कर्नलगंज शाखा के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर अशोक कुमार दीक्षित और एम/एस जीआर एसोसिएट्स, इलाहाबाद के प्रोपराइटर गोविंद राम तिवारी को दोषी करार देते हुए 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही, दोनों पर कुल 13 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
सीबीआई की ओर से सोमवार को जारी एक प्रेस नोट के अनुसार, यह मामला साल 2003-2004 के दौरान का है, जब अशोक कुमार दीक्षित इलाहाबाद के कर्नलगंज शाखा में ब्रांच मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्होंने गोविंद राम तिवारी के साथ मिलकर आपराधिक साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 36 हाउसिंग लोन स्वीकृत और वितरित किए। इन लोन की कुल राशि करीब 1 करोड़ 69 लाख 45 हजार रुपए थी। जांच में यह सामने आया कि इन फर्जी लोन के जरिए बैंक को करीब 1 करोड़ 81 लाख 85 हजार 500 रुपए का नुकसान हुआ, जबकि आरोपियों को इसका सीधा फायदा पहुंचा।
सीबीआई ने इस मामले को 31 मई 2005 को स्रोत से मिली जानकारी के आधार पर दर्ज किया था। विस्तृत जांच के बाद एजेंसी ने 8 अगस्त 2007 को आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें दोनों आरोपियों को नामजद किया गया। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने माना कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से बैंक को धोखा देकर फर्जी लोन पास किए और आर्थिक अपराध को अंजाम दिया।
इस फैसले को बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि वित्तीय संस्थानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों को कानून के तहत कड़ी सजा मिलेगी। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी आर्थिक अपराधों के खिलाफ अपनी कार्रवाई लगातार जारी रखेगी और दोषियों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।




