मुंबई, 4 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता महेश तापसे ने बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की हार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित युवा संवाद, महाराष्ट्र सीईटी परीक्षा विवाद समेत कई अन्य मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम देश में बदलते जनमत का संकेत हैं। सरकार को युवाओं और छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से लेना चाहिए।
बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा की हार को महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश बताते हुए महेश तापसे ने कहा कि यह वही सीट है जहां से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। उनके सीट छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा की हार यह दर्शाती है कि जनता का रुझान किस दिशा में जा रहा है। बिहार में भाजपा की इस हार को केवल एक स्थानीय चुनाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह पूरे देश में बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है। यदि भाजपा अपने मजबूत माने जाने वाले क्षेत्र में भी हार रही है, तो आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के मुंबई दौरे और जेनजी के साथ संवाद कार्यक्रम पर तापसे ने कहा कि केवल संवाद करने से पहले संगठन और भाजपा को युवाओं से माफी मांगनी चाहिए। हाल के आंदोलनों के दौरान युवाओं की भावनाओं और उनकी ताकत को नजरअंदाज किया गया। केंद्र सरकार ने पुलिस और प्रशासन के बल पर युवाओं के आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया, जो पूरी तरह गलत था। यदि युवाओं का विश्वास जीतना है तो सबसे पहले उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए उनसे माफी मांगनी चाहिए।
बृजभूषण शरण सिंह को अदालत से राहत मिलने के मामले में महेश तापसे ने कहा कि वह न्यायालय के फैसले पर कोई विशेष टिप्पणी नहीं करना चाहते। यदि किसी पक्ष को अदालत के निर्णय पर आपत्ति है, तो उसे उच्च न्यायालय जाने का पूरा अधिकार है। न्यायिक प्रक्रिया में दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और तर्क रखते हैं और अदालत उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाती है। ऐसे में यदि कोई पक्ष निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत उच्च अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में तापसे ने संबंधित ट्रस्ट प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपए के कथित गबन की जानकारी थी तो कार्रवाई किसी पत्र या शिकायत का इंतजार किए बिना पहले ही हो जानी चाहिए थी। बाद में की गई कार्रवाई केवल दिखावे जैसी प्रतीत होती है। यदि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई की होती तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
महाराष्ट्र सीईटी परीक्षा से जुड़े मुद्दे को लेकर रोहित पवार द्वारा उठाए गए सवालों का समर्थन करते हुए महेश तापसे ने कहा कि यह लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा विषय है और इस पर गंभीर कार्रवाई होनी चाहिए। यदि किसी पात्रता परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होता है तो सबसे अधिक नुकसान उन मेहनती और मेधावी छात्रों का होता है, जिन्होंने पूरे वर्ष ईमानदारी से तैयारी की होती है। ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं। अब समय आ गया है कि पात्रता परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जाए। रोहित पवार ने मीडिया के सामने जिन तथ्यों को रखा है, उनकी पुलिस को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और राज्य के शिक्षा मंत्री को भी परीक्षा प्रणाली में आवश्यक सुधारों की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे सुधारों का परिणाम भी सामने आना चाहिए। यदि देश अपने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सतर्क नहीं रहेगा तो इसका दूरगामी नुकसान पूरे राष्ट्र को उठाना पड़ सकता है।

