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बीबीएमकेयू के दीक्षांत समारोह में 149 मेधावियों को गोल्ड मेडल, राज्यपाल बोले- ज्ञान, तकनीक और नवाचार से बने कोयलांचल की पहचान

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धनबाद, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। कोयलांचल की पहचान केवल कोयले और खनन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह क्षेत्र ज्ञान, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार में भी अपनी पहचान बनाए। झारखंड के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय (बीबीएमकेयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि यह बात कही।

समारोह में वर्ष 2024 और 2025 में उत्तीर्ण कुल 31,926 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें से 149 मेधावी विद्यार्थियों को मंच से डिग्री और स्वर्ण पदक दिए गए। सम्मानित विद्यार्थियों में 99 छात्राएं और 50 छात्र शामिल हैं। समारोह में 45 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि भी प्रदान की गई। विश्वविद्यालय में पहली बार डी.लिट की उपाधि भी दी गई। डुमरी के विधायक जयराम महतो को अंग्रेजी विभाग से पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।

राज्यपाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि महान शिक्षाविद् और जननेता दिवंगत बिनोद बिहारी महतो ने शिक्षा को सामाजिक जागरूकता, आत्मसम्मान और बदलाव का माध्यम बनाने का संदेश दिया था। विद्यार्थियों को अपनी उपलब्धियों के साथ समाज की प्रगति में भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोयलांचल ने देश के औद्योगिक विकास और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

हालांकि, इस क्षेत्र के सामने पर्यावरण संरक्षण, खनन क्षेत्रों की सुरक्षा, श्रमिकों का कल्याण और ऊर्जा की बदलती जरूरतों जैसी चुनौतियां भी हैं। विश्वविद्यालय को स्थानीय समस्याओं से जुड़े शोध को बढ़ावा देना चाहिए। विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण और ऊर्जा के क्षेत्र में नए समाधान विकसित करने की जरूरत है।

संतोष गंगवार ने कहा कि डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्टार्टअप और उद्यमिता ने युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ कौशल, रचनात्मकता और लगातार सीखने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी तलाशने के बजाय अपनी योग्यता और नवाचार के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा करने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने कहा कि किसी विश्वविद्यालय की सफलता केवल डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों की संख्या से नहीं, बल्कि समाज और देश के विकास में उनके योगदान से भी तय होती है। इसके लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच सार्थक संवाद, नियमित अध्ययन, नवाचार और व्यावहारिक अनुभवों को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की भावी प्रगति युवाओं के ज्ञान, कौशल और कर्मठता पर निर्भर करेगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन और धैर्य के साथ आगे बढ़ने, नशे से दूर रहने तथा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने, परिवार और समाज का सम्मान करने तथा अपने आचरण में नैतिकता बनाए रखने की जरूरत है।