नई दिल्ली, 19 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बार फिर संयुक्त सैन्य अभ्यास कर रही हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ का पांचवां संस्करण 19 अक्टूबर को केरल के तिरुवनंतपुरम में शुरू हो गया। यह अभ्यास 1 नवंबर तक चलेगा। इसमें भारतीय सेना और ऑस्ट्रेलियाई सेना के लगभग 120-120 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में संयुक्त अभियान चलाने की क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत दोनों देशों के सैनिक संयुक्त योजना बनाने, सामरिक गतिविधियों और युद्ध जैसी परिस्थितियों में अभियान चलाने का अभ्यास करेंगे। प्रशिक्षण में हवाई और समुद्री आयामों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि सैनिक अलग-अलग परिस्थितियों में बेहतर तालमेल के साथ काम कर सकें। अभ्यास में भारतीय सेना की टुकड़ी में गढ़वाल राइफल्स के सैनिकों के साथ अन्य सैन्य शाखाओं और सेवाओं के कर्मी भी शामिल हैं।
वहीं, ऑस्ट्रेलियाई सेना की ओर से 13वीं ब्रिगेड के सैनिक इसमें भाग ले रहे हैं। यह सैन्य अभ्यास तिरुवनंतपुरम स्थित विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार इसका विषय द्वीपीय और तटीय वातावरण में उप-पारंपरिक सैन्य अभियान चलाना है। इसके माध्यम से दोनों सेनाएं अपनी रणनीतियों, तकनीकों और अभियान प्रक्रियाओं को साझा करेंगी। साथ ही, एक-दूसरे की कार्यप्रणाली को समझकर संयुक्त रूप से अभियान चलाने की क्षमता विकसित करेंगी।
सेना के मुताबिक अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिक वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसमें तटीय और द्वीपीय क्षेत्रों में समन्वित सैन्य अभियान चलाने, निगरानी और टोह लेने तथा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करने का अभ्यास शामिल है। इसके अलावा, मानवीय सहायता और आपदा राहत से जुड़ी परिस्थितियों में प्रभावी प्रतिक्रिया देने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
सैनिक संयुक्त सामरिक योजनाएं तैयार करेंगे और विभिन्न अभियानों के दौरान आपसी तालमेल मजबूत करेंगे। दोनों सेनाओं के जवान अपने अनुभव और बेहतर कार्यप्रणालियां भी साझा करेंगे। इस प्रशिक्षण से सैनिकों को ऐसे क्षेत्रों में अभियान चलाने की चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी, जहां समुद्री परिस्थितियों, भौगोलिक स्थिति और सीमित संपर्क साधनों के कारण सैन्य गतिविधियों का समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है। ‘ऑस्ट्राहिंद-2026’ की एक खास बात यह है कि पहली बार न्यूजीलैंड का एक पर्यवेक्षक दल भी इसमें हिस्सा लेगा। इससे अभ्यास में एक नया आयाम जुड़ेगा।
बता दें कि इस संयुक्त सैन्य अभ्यास का चौथा संस्करण 13 से 26 अक्टूबर 2025 तक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ स्थित इरविन बैरक्स में आयोजित किया गया था। इस बार भारत में हो रहे अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं को अपने अनुभव साझा करने और संयुक्त अभियानों के लिए तैयारी बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
‘ऑस्ट्राहिंद’ भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी विश्वास, अभियान क्षमता और तालमेल बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के दोनों देशों के साझा संकल्प को भी मजबूती देगा।
