पटना, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर बिहार में अर्हता प्राप्त छूटे हुए एवं युवा निर्वाचकों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आयोग ने सभी हितधारकों और जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को इस अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
आयोग के निर्देशों के अनुसार राज्य भर में छूटे हुए मतदाताओं की पहचान और उनका नाम मतदाता सूची में जोड़ने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसके लिए मतदान केंद्र स्तरीय पदाधिकारी (बीएलओ) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन के दौरान यदि कोई व्यक्ति मतदाता के रूप में अर्हता प्राप्त करता है, तो प्ररूप-6 के माध्यम से निर्वाचक सूची में उसका पंजीकरण किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई एक माह के अंदर पूर्ण की जानी है। मतदान केंद्र स्तरीय पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि हर अर्हता प्राप्त व्यक्ति के लिए अनिवार्य रूप से प्ररूप-6 भरा जाए, ताकि कोई भी योग्य मतदाता छूट न जाए।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बीएलओ द्वारा तैयार की गई विषयांकित सूची को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि बीएलए के साथ भी साझा किया जाएगा। अभियान समाप्त होने के बाद निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ईआरओ) द्वारा मतदान केंद्र वार तैयार अंतिम सूची को भी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके अलावा, मतदाताओं की सुविधा के लिए आवश्यकतानुसार मतदान केंद्रों पर विशेष कैंप का आयोजन भी किया जाएगा। आयोग ने विशेष रूप से रात्रि आश्रय स्थलों, मजदूरों की कॉलोनियों, गृहविहीन व्यक्तियों और समाज के कमजोर वर्गों के लोगों के लिए अलग से विशेष कैंप लगाने की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी मताधिकार से जोड़ा जा सके।
वर्तमान अभियान की मॉनिटरिंग नियमित रूप से राज्य स्तर, जिला स्तर और निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी स्तर पर की जाएगी। निर्वाचन विभाग का लक्ष्य है कि इस विशेष अभियान के जरिए बिहार में शत-प्रतिशत युवा और छूटे हुए मतदाताओं का पंजीकरण सुनिश्चित किया जा सके, जिससे आगामी चुनावों में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी हो सके।
