गांधीनगर, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि राज्य के नागरिकों को मिले बेहतरीन रोड नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए भविष्य में इन्हें और भी गौरवपूर्ण बनाने की दिशा में गति के लिए सामूहिक चिंतन महत्वपूर्ण है।
यह बात उन्होंने गुरुवार को गांधीनगर में राज्य सरकार के सड़क एवं भवन विभाग के पहले दो दिवसीय चिंतन शिविर का शुभारंभ करते हुए कही।
‘गति-गुणवत्ता और गौरव : एक्सीलरेटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर विकसित गुजरात 2047’ विषय पर आयोजित इस शिविर में वर्क असिस्टेंट से लेकर सचिव स्तर तक के अधिकारी सामूहिक मंथन करने वाले हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2003 में चिंतन शिविर की परंपरा शुरू की थी, और तब उन्होंने यह विचार दिया था कि, “साथ आना शुरुआत है, साथ विचार करना प्रगति है और साथ काम करना सफलता है।”
मुख्यमंत्री ने ‘मैं नहीं, हम’ की भावना तथा ‘स्वयं से वयम’ के ध्येय को रखते हुए इस विचार को साकार करने में चिंतन शिविरों की निरंतर सफलता की सराहना की। उन्होंने सड़क एवं भवन विभाग को सरकार का अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग बताते हुए कहा कि सड़कों के कार्य, पुलों के कार्य या आम जनता से जुड़े कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर के बेहतरीन कार्यों की लोग हमेशा प्रशंसा करते हैं।
इतना ही नहीं, यदि कहीं कोई कमी दिखाई देती है तो लोग उसकी तुरंत आलोचना भी करते हैं। इसलिए इस विभाग के लिए यह सतर्कता बरतनी बहुत ही आवश्यक है कि क्वालिटी से कोई समझौता न हो तथा अच्छे से अच्छा कार्य हो।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यदि अनजाने में कोई गलती हुई हो, तो उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन जानबूझकर की गई गलती या चूक माफ नहीं की जा सकती। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में विशेष ध्यान देने के साथ-साथ मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार कार्य हो तथा कार्य समय-सीमा में पूरा हो, इन बातों पर फोकस करते हुए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता समझाई।
सीएम पटेल ने कहा कि चिंतन शिविर व्यक्तिगत जीवन में भी आत्ममंथन के जरिए सुधार लाने का एक सक्षम माध्यम है। उन्होंने कहा कि सभी को इस बारे में भी गंभीरता से सोचना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को साकार करने में गुजरात को अग्रणी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
उन्होंने आह्वान किया कि गुजरात आज देश का रोल मॉडल है और सभी की नजर गुजरात की ओर है। ऐसे में, ‘विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात’ के संकल्प के साथ गति, गुणवत्ता और गौरव दिलाने वाले टिकाऊ विकास की दिशा में सभी सामूहिक पुरुषार्थ के साथ आगे बढ़ें।
मुख्यमंत्री ने शिविर की शुरुआत में ‘बिल्डिंग हेल्थ मॉनिटरिंग’ और ‘ब्रिज एसेट मैनेजमेंट’ सहित पुस्तिकाओं का विमोचन किया और गवर्नेंस परफॉर्मेंस इंडेक्स (जीपीआई) के मानदंडों के अनुसार श्रेष्ठ कार्य करने वाले इंजीनियरों-अधिकारियों को अवॉर्ड से सम्मानित भी किया।
उल्लेखनीय है कि सड़क एवं भवन विभाग राज्यभर में गांवों से लेकर शहरों तक 1 लाख 29 हजार किलोमीटर रोड नेटवर्क, 11 हजार से अधिक पुलों तथा विभिन्न सरकारी इमारतों के रखरखाव-मरम्मत के साथ-साथ मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से 18 हजार से अधिक गांवों तथा 14 हजार बस्तियों को कवर करने के निरंतर कार्य में अहर्निश सेवारत है।
इस अवसर पर मुख्य सचिव एमके दास ने बधाई देते हुए कहा कि सड़क एवं भवन विभाग राज्य के विकास को गति देने वाला, आपदा या आपातकाल के समय त्वरित प्रतिक्रिया देने वाला तथा सरकार का सबसे पुराना और लोकप्रिय विभाग है। सड़कों और पुलों के निर्माण के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने श्रीमद् भगवद् पुराण में वर्णित महाराजा पृथु, जिन्होंने पहली बार समतल सड़कें बनवाई थीं, रामायण काल के रामसेतु तथा शेरशाह सूरी द्वारा निर्मित ग्रैंड ट्रंक रोड और रोडसाइड एमेनिटीज के उदाहरण देते हुए जनसेवा के क्षेत्र में सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के सनातन योगदान का वर्णन किया।
विकास की भविष्य की दिशा स्पष्ट करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि सड़क एवं भवन विभाग का बजट बहुत ही कम समय में 12,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 30,000 करोड़ रुपए हो गया है। ‘विकसित गुजरात-2047’ के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य की अर्थव्यवस्था को 3.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य के मुकाबले आगामी 20 वर्षों में पिछली सदियों की तुलना में 11 गुना अधिक निर्माण कार्य करना है। आगामी समय में भारी यातायात की समस्या का सामना करने के लिए सड़कें तेज, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण बनें, यह अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने ‘फ्रॉम द ग्राउंड अप’ दृष्टिकोण अपनाने, जमीन पर उपस्थिति बढ़ाने तथा ठेकेदारों से उचित कार्य लेने का निर्देश दिया। उन्होंने इस शिविर में भाग ले रहे सभी लोगों को पद के भेदभाव के बिना स्वतंत्र रूप से सोच-विचार कर वर्ष 2047 के लिए स्पष्ट ‘एक्शन प्लान’ तैयार करने का सुझाव दिया।
सड़क एवं भवन विभाग के सचिव पीआर पटेलिया ने स्वागत भाषण में चिंतन शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस चिंतन शिविर में विभाग के नियमित कार्यों से आगे बढ़कर आत्ममंथन करना, नए विचारों एवं तकनीक पर चर्चा करना तथा ‘विकसित गुजरात-2047 : फास्ट, सेफ एंड सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर’ के लक्ष्य को हासिल करना है।
उन्होंने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों और नई पहलों की घोषणा की गई है, जिसमें अधिकारियों के लिए गवर्नेंस परफॉर्मेंस इंडेक्स (जीपीआई) तथा ठेकेदारों के लिए परफॉर्मेंस बेस्ड रेटिंग और क्वालिटी कंट्रोल बेस्ड इवैल्यूएशन सिस्टम (क्यूसीबीएस) लागू करना शामिल है। इसके अलावा, निविदा अनुमोदन प्रक्रिया की समय सीमा को कम करके त्वरित कार्यान्वयन सुनिश्चित किया गया है।
उद्घाटन समारोह से पूर्व, प्रेरक वक्ता, अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष तथा हरे कृष्ण मंदिर के पूज्य संत रेयराम दास ने सभी सहभागियों को मार्गदर्शन दिया। इस कार्यक्रम में जल संसाधन सचिव पीसी व्यास, सड़क एवं भवन विभाग के विशेष सचिव जेए गांधी सहित राज्यभर से सड़क एवं भवन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
