पटना, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्यसभा जाने के बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सबसे विश्वासपात्र नेता श्रवण कुमार को जदयू विधायक दल का नेता बनाया है। इस संबंध में बाकायदा अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें इसकी जानकारी दी गई।
नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद लोगों को इस बात का इंतजार था कि अब जेडीयू विधायक दल की कमान किसे सौंपी जाती है। नीतीश कुमार ने अब इस इंतजार पर विराम लगा दिया है।
श्रवण कुमार को नीतीश कुमार का सबसे विश्वासपात्र साथी बताया जाता है। इससे पहले वह पूर्व की सरकारों में कई अहम मंत्रालयों कि जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। श्रवण कुमार ने आज से पांच दशक पहले नीतीश कुमार के साथ ही अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। श्रवण कुमार 1995 से नालंदा से विधायक रहे हैं। वे नीतीश कुमार की तरह ही कुर्मी जाति से आते हैं।
इससे पहले, सोमवार को पटना में नीतीश कुमार के आवास पर विधायक दल का नेता चुने जाने के लिए बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सभी ने यह फैसला किया कि विधायक दल का नेता चुने जाने की जिम्मेदारी नीतीश कुमार को ही सौंप दी जाए। इसके बाद ही सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि वो यह जिम्मेदारी किसे सौंपते हैं।
श्रवण कुमार के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1974 में जेपी आंदोलन के दौरान ही हुई थी। इस आंदोलन में नीतीश कुमार भी शामिल थे। तभी से नीतीश कुमार और श्रवण कुमार के बीच रिश्ते प्रगाढ़ हुए, जो अभी तक बरकरार हैं। श्रवण कुमार ने बिहार में जदयू को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया।
खास बात यह है कि श्रवण कुमार नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा से ही आते हैं। 2005 में नीतीश कुमार के सीएम पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद श्रवण कुमार जदयू के मुख्य सचेतक भी रहे।
हाल ही में श्रवण कुमार को वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली है। राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि श्रवण कुमार को विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद जदयू को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

