बिजेंद्र यादव का तेजस्वी के ‘परिवारवाद’ पर तंज, कहा-‘रिश्तेदारों को पद देना महिला सशक्तीकरण नहीं’

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पटना, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार की राजधानी पटना में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव के बयान पर राज्य के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों को राजनीतिक पदों पर बैठाना महिला आरक्षण नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, आरक्षण का उद्देश्य आम महिलाओं को अवसर देना है न कि केवल राजनीतिक परिवारों को लाभ पहुंचाना।

बिहार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि परिवारवाद और आरक्षण में बड़ा अंतर है। अगर कोई अपनी मां, बहन या अन्य रिश्तेदारों को विधायक, सांसद या मुख्यमंत्री बना देता है, तो यह असली महिला सशक्तीकरण नहीं है। आरक्षण का लाभ समाज के सभी वर्गों की महिलाओं तक पहुँचना चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने बिहार की बिजली व्यवस्था को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि नासा द्वारा जारी तस्वीरों में बिहार की बिजली व्यवस्था को देश में सबसे बेहतर बताया गया है और इसे ‘हीरा’ कहा गया है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के समय राज्य में मात्र 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, जो अब बढ़कर 8-9 हजार मेगावाट तक पहुंच गई है।

वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष के रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विरोध स्वाभाविक रूप से निंदनीय है और इससे महिलाओं में नाराजगी बढ़ी है।

उन्होंने यह भी बताया कि बिहार में पहले ही पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया जा चुका है, जो राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

विजय कुमार चौधरी ने जेडीयू विधायक दल की बैठक को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता शामिल होंगे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

इस बीच केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने नई सरकार को फ्लोर टेस्ट कराने की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के पास बहुमत है, तो उसे सदन में साबित करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए कांग्रेस पर इसका विरोध करने का आरोप लगाया।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे आने वाले समय में सियासी माहौल और गरमा सकता है।