SGSU Advertisement
Home राजनीति ब्रिक्स का बढ़ता दायरा भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रमाण: अजीत गोपचाडे

ब्रिक्स का बढ़ता दायरा भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रमाण: अजीत गोपचाडे

0
4

नई दिल्ली, 27 अक्टूबर (आईएएनएस)। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर भाजपा सांसद अजीत गोपचाडे ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और विकासशील देशों के साथ उसके सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के लिए यह गर्व और सम्मान की बात है कि वह 21 देशों की मेजबानी कर रहा है। वहीं, 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडी गठबंधन की रैली को लेकर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा और उस पर झूठ फैलाने तथा राजनीतिक नाटक करने का आरोप लगाया।

दिल्ली में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान भाजपा सांसद अजीत गोपचाडे ने कहा कि भारत के लिए 21 देशों की मेजबानी करना गर्व और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत में इन देशों का स्वागत किया जा रहा है और विकासशील देशों के साथ मिलकर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बन रहा है, वह सराहनीय है।

अजीत गोपचाडे ने कहा कि ब्रिक्स मंच पर भाग लेने वाले देशों की संख्या 11 से बढ़कर 21 हो जाना, इस संगठन के लगातार विस्तार और बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। पश्चिमी देशों ने भी इस बदलाव को देखा है।

भाजपा सांसद ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और पहलगाम की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान भारत ने कूटनीतिक स्तर पर विभिन्न देशों का समर्थन देखा। इन घटनाओं के दौरान कई देशों ने मजबूती से भारत का साथ दिया। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और कूटनीतिक संबंधों का उदाहरण बताया।

वहीं, 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली इंडी गठबंधन की प्रस्तावित रैली पर प्रतिक्रिया देते हुए अजीत गोपचाडे ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता झूठी बातें फैलाते हैं और उन्हें देश के व्यापारियों, किसानों तथा आर्थिक मजबूती की चिंता नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा को लगातार चुनावों में जनता का समर्थन मिल रहा है जबकि विपक्ष को हार का सामना करना पड़ रहा है। जनता भाजपा के साथ खड़ी है और भविष्य में भी पार्टी को समर्थन मिलता रहेगा। अजीत गोपचाडे ने विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इंडी गठबंधन के नेता बार-बार विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक ड्रामा करते हैं।

भाजपा सांसद ने 1 नवंबर की तारीख का जिक्र करते हुए कहा कि इस दिन को सिख नरसंहार की याद में ‘काला दिवस’ के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष की प्रस्तावित रैली को लेकर गंभीर आरोप लगाए और विपक्षी दलों के रवैये को राष्ट्रविरोधी बताया।