नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने कैंसर मरीजों को बड़ी राहत देते हुए 137 गैर-अनुसूचित (नॉन-शेड्यूल्ड) कैंसर रोधी दवाओं की कीमतों में भारी कमी लाने का फैसला किया है। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत कार्यरत राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने इन दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन युक्तसंगतीकरण (टीएमआर) लागू किया है।
टीएमआर लागू होने से कई दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में 70 प्रतिशत तक कमी आने की उम्मीद है। संशोधित मूल्य 9 नवंबर से प्रभावी होंगे।
यह पहल एनपीपीए के 2019 के पायलट टीएमआर अभ्यास की सफलता पर आधारित है, जिसके तहत 42 कैंसर रोधी दवाओं के व्यापार मार्जिन को 30 प्रतिशत तक सीमित किया गया था। उस अभ्यास के बाद गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं के 526 ब्रांडों के एमआरपी में 90 प्रतिशत तक की कमी की गई थी। वर्तमान अभ्यास इस दृष्टिकोण को स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के तहत विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित सूची के आधार पर कैंसर रोधी दवाओं के एक बड़े समूह तक इस दृष्टिकोण का विस्तार करता है।
विशेषज्ञ समिति में देशभर के अस्पतालों के प्रमुख कैंसर विशेषज्ञ, चिकित्सा विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी शामिल थे। समिति ने टीएमआर (अधिकतम खुदरा मूल्य) के अंतर्गत शामिल करने के लिए 137 दवाओं पर विचार-विमर्श किया और उनकी सिफारिश की। इस सूची को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा।
समिति द्वारा अनुशंसित दवाओं को ध्यान में रखते हुए एनपीपीए ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के अनुच्छेद 19 के अनुसार, व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30 प्रतिशत पर सीमित कर दिया है। 17 अक्टूबर 2026 की राजपत्र अधिसूचना एनपीपीए की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है । इस उपाय से कैंसर से प्रभावित कई रोगियों और उनके परिवारों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अक्सर उपचार की उच्च लागत के कारण भारी वित्तीय बोझ का सामना करना पड़ता है।
राजपत्र अधिसूचना के प्रकाशन के 7 दिनों के भीतर सभी निर्माताओं को एनपीपीए को अपने संशोधित मूल्यों की सूचना देना अनिवार्य होगा। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। निर्माताओं को अपनी वेबसाइट पर मूल्य सूची प्रदर्शित करना और सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को व्यापक रूप से वितरित करना अनिवार्य होगा। सभी खुदरा विक्रेताओं और अस्पतालों को 9 नवंबर से कम कीमतों पर दवाएं बेचनी होंगी और अपनी फार्मेसियों में संशोधित मूल्य प्रदर्शित करने होंगे। अस्पतालों को अपनी वेबसाइट पर भी संशोधित मूल्य प्रमुखता से प्रदर्शित करने होंगे। उपभोक्ता फार्मा सही दाम ऐप और एनपीपीए वेबसाइट का उपयोग करके दवाओं के संशोधित मूल्यों की जांच कर सकते हैं।
चूंकि एंटी-कैंसर दवाओं की एक महत्वपूर्ण आपूर्ति सीधे अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों को की जाती है, इसलिए वे कार्यान्वयन की तारीख से ऐसी दवाओं की संशोधित कीमतें सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। राज्य औषधि नियंत्रक (स्टेट ड्रग कंट्रोलर्स) निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं सहित डीलरों, अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
कैंसर रोधी दवाओं पर टीएमआर का उपाय वितरण और खुदरा चैनलों में अत्यधिक व्यापार मार्जिन को नियंत्रित करने, वैध निर्माता राजस्व की रक्षा करने और कृत्रिम बाजार की कमी को रोकने के उद्देश्य से है। दवा कंपनियों को अधिसूचित फॉर्मूलेशन के लिए वर्तमान उत्पादन और आपूर्ति स्तर बनाए रखना होगा ताकि रोगियों को समय पर और निर्बाध रूप से दवाएं मिल सकें।
कैंसर रोधी दवाओं को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर, यह पहल रोगियों और उनके परिवारों पर वित्तीय बोझ को कम करने में मदद करेगी और कैंसर उपचार तक समान पहुंच के व्यापक सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्य का समर्थन करेगी।
