छतरपुर, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रविवार को दुबई-तेल अवीव फ्लाईदुबई विमान पर हुए हमले के दौरान यात्रियों को बचाने के लिए कैप्टन स्मित मच्छार के संघर्ष की कहानी को याद करते हुए कहा कि भगवान हनुमान में उनकी आस्था और हनुमान चालीसा के पाठ ने उन्हें संकट का सामना करने का आत्मविश्वास दिया।
मध्य प्रदेश के छतरपुर में दिव्य दरबार के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि हनुमान जी का भक्त और हनुमान चालीसा पढ़ने पर आज हमें गर्व है। बागेश्वर महाराज ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉल पर कैप्टन स्मित मच्छार से बात कर रहे थे, तब कैप्टन ने बताया कि उसके सहयोगी पायलट ने उन पर चाकू से हमला कर दिया था। जब जहाज क्रैश होने की स्थिति में था, तब उस समय बहादुरी का परिचय देते हुए कैप्टन स्मित ने अपने प्राणों की बाजी लगाकर 100 से अधिक लोगों की जान बचाई।
बागेश्वर महाराज ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने जब वीडियो कॉल पर कैप्टन स्मित से पूछा कि लोगों की जान कैसे बचाई और यह आत्मविश्वास कैसे आया और हवाई जहाज को कैसे कंट्रोल किया? इस पर स्मित ने बताया कि जब जहाज नीचे गिरने लगा, तो हमने हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर दिया। हनुमान चालीसा के प्रभाव से हमें आत्मविश्वास मिला और आज हम इतने लोगों की जान बचा पाए। बागेश्वर महाराज ने कहा कि जो हनुमान जी की भक्ति करता है, उसके अंदर आत्मविश्वास की एक शक्ति प्रकट होती है।
बता दें कि 30 सितंबर को दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में पायलट कैप्टन स्मित मच्छार पर सहयोगी पायलट ने चाकू से हमला किया, जिसके बाद विमान तेजी से नीचे जाने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय पायलट ने हमलावर का बहादुरी से सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों ने कॉकपिट में पहुंचकर हमलावर को काबू कर लिया। हमलावर के काबू में आने के बाद गंभीर रूप से घायल कैप्टन मच्छार को प्राथमिक उपचार देकर स्थिर किया गया। इसके बाद विमान की सऊदी अरब में आपात लैंडिंग कराई गई और मच्छार को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कैप्टन मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने घटना के समय उनके साहस, सूझबूझ और संयम की सराहना की थी। प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनके प्रयासों से विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की जान बचाने में मदद मिली।
