नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात में स्थित जूनागढ़ के नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के ट्रस्टी प्रतीक मोरी और फैकल्टी मेंबर डॉ. अभय नलावडे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन पर ‘नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन’ (एनसीआईएसएम) की हियरिंग कमेटी के एक सदस्य को 10 लाख रुपये की रिश्वत देने की कोशिश करने का आरोप है।
एफआईआर के अनुसार, एनसीआईएसएम ने लखनऊ के प्रबुद्ध आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. रूपाली आर. महादिक को हियरिंग कमेटी का सदस्य नियुक्त किया था। उन्हें गुजरात के जूनागढ़ स्थित नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के 13 ऐसे शिक्षकों की जांच करनी थी, जिनके बारे में शक था कि वे सिर्फ कागजों पर ही मौजूद हैं।
एफआईआर में कहा गया है कि 18 अगस्त को डॉ. अभय नलावडे ने महादिक को कथित तौर पर व्हाट्सएप कॉल किया और उन शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक रिपोर्ट देने के बदले रिश्वत की पेशकश की। इसके बाद शिकायतकर्ता ने एनसीआईएसएम के ‘मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन’ (एमएआरबीआईएसएम) के अध्यक्ष डॉ. मुकुल पटेल को इस बारे में बताया। एफआईआर के मुताबिक, उन्होंने महादिक को उस व्यक्ति के संपर्क में बने रहने की सलाह दी ताकि उसे सबूत के साथ पकड़ा जा सके।
एफआईआर में आगे कहा गया है कि 20 अगस्त को नोबेल आयुर्वेदिक कॉलेज के ट्रस्टी प्रतीक मोरी ने कथित तौर पर महादिक से बात की और सभी 13 शिक्षकों के नाम साफ करने के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट देने के बदले उन्हें 10 लाख रुपये देने का वादा किया। महादिक रिश्वत नहीं लेना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने मोरी और नलावडे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए 21 अगस्त को सीबीआई को हाथ से लिखी शिकायत सौंपी।
एफआईआर में कहा गया है कि गुप्त जांच से शुरुआती तौर पर पता चला कि मोरी और नलावडे ने शिकायतकर्ता को 13 शिक्षकों के नाम साफ करने के लिए 10 लाख रुपये देने का प्रस्ताव और वादा किया था। जांच के दौरान मोरी ने कथित तौर पर 22 अगस्त को दिल्ली में 10 लाख रुपये की रिश्वत देने का वादा किया। सीबीआई ने कथित आपराधिक साजिश और सरकारी कर्मचारी को रिश्वत देने के मामले में केस दर्ज किया है।



