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सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा विपक्ष, खड़गे बोले- ये मौलिक अधिकारों का मुद्दा

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नई दिल्ली, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन जारी है। इसी सिलसिले में विपक्षी दलों के 10 सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने के लिए निकला। राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले समेत कई नेताओं ने अपनी बात रखी।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यह मुद्दा केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नहीं है, बल्कि देश के नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है। विपक्ष शुरू से ही मौलिक अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें हासिल करने की बात उठाता रहा है। खड़गे ने राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को अंदर जाने की अनुमति देने के मामले में स्थिति ऐसी है कि 10 सदस्यों के हस्ताक्षर लेकर वे दरवाजे पर ही रहेंगे, जबकि अंदर जाने की अनुमति केवल उन्हीं 10 लोगों को मिलेगी।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इसे डर कहते हैं, इसे कायरता कहते हैं, इसे आतंक कहते हैं।

कांग्रेस सांसद कल्याण वैजिनाथराव काले ने वोट चोरी के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यह मुद्दा सबसे पहले महाराष्ट्र में उठा था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस विषय को उठाया, जिसके बाद देशभर में लोगों ने इसके बारे में देखा और पढ़ा। काले के मुताबिक, इसके बाद ही यह संघर्ष शुरू हुआ।

कांग्रेस नेता अजय माकन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार अब इस मामले पर ध्यान देगी। यह सिर्फ ज्ञानेश कुमार का मामला नहीं है; पूरी चुनावी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। ईवीएम को हटाने और चुनावी प्रक्रिया में देश के लोगों का भरोसा और विश्वास बहाल करने की जरूरत है।”

कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि वोट चोरी का सबसे पहला सवाल उठाया गया था और आज भी हम यही कह रहे हैं कि चाहे महाराष्ट्र हो, हरियाणा हो, पश्चिम बंगाल हो या बिहार, जिस तरह से वोट चोरी हुए हैं, उसके लिए ज्ञानेश कुमार ही जिम्मेदार हैं।

कांग्रेस सांसद जी कुमार नाइक ने कहा कि हमने संसद के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल, जिसे आज ‘संविधान सदन’ कहा जाता है, में दो घंटे तक चर्चा की। हमें लगा कि हम देश के लोकतंत्र के एक बहुत ही अहम मौके का हिस्सा बन रहे हैं। हमें लगता है कि लोकतंत्र खतरे में है क्योंकि मौजूदा अधिकारियों के गलत कामों की वजह से चुनाव आयोग जैसी अहम संवैधानिक संस्था ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है। मुख्य चुनाव आयुक्त और बाकी दो चुनाव आयुक्तों ने जिस तरह से काम किया है, उससे उन्होंने अपनी विश्वसनीयता तो खोई ही है, साथ ही भारत के चुनाव आयोग का नाम भी खराब किया है। यह हमारा जरूरी फर्ज है कि हम एकजुट हों, घरों और संसद से बाहर निकलें, सड़कों पर उतरें और देश के लोगों को उस बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण सरकार से होने वाले खतरे के बारे में आगाह करें, जो लोकतांत्रिक नियमों से भटकने पर आमादा है। अब सड़कों पर उतरने का सही समय आ गया है। बस कुछ ही समय की बात है जब ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और जाना होगा। ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तो बस पहला कदम है, लेकिन हमारा असली मकसद लोकतंत्र को बहाल करना है।