नई दिल्ली, 16 अगस्त (आईएएनएस)। ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने वंदे मातरम पर सोनिया गांधी के रुख पर सवाल उठाए, आरोप लगाया कि कांग्रेस इसके पूरे गायन का विरोध करती है। इससे साथ ही मौलाना ने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीतिक का आरोप भी लगाया। सभी तथाकथित पार्टियों ने मुसलमानों को ठगा है।
मौलाना साजिद रशीदी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा,”भारत में मुसलमान दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। इस दूसरी सबसे बड़ी आबादी की भावनाओं का ध्यान रखना हर सरकार और हर विपक्षी पार्टी की जिम्मेदारी है। सरकार इन भावनाओं का ध्यान नहीं रख रही है; सरकार ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक बिल लाई थी। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने जो किया वह अच्छा था क्योंकि कांग्रेस का 1937 में एक प्रस्ताव था। मुसलमानों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बाद गीत की आखिरी छह पंक्तियों को आधिकारिक तौर पर इससे हटा दिया गया था। यह मुसलमानों के विरोध करने के बाद हटाया गया।”
मौलाना ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने उन पंक्तियों को शामिल करके वंदे मातरम को गाने के लिए कहा। एक बात जरूर है कि कांग्रेस ने ऐसा अपने वोट बैंक के लिए किया है। कांग्रेस ने मुसलमानों को खुश करने और संविधान में मुस्लिम समुदाय को मिली धार्मिक आजादी के लिए किया है।
सोनिया गांधी इस्लाम धर्म की संवेदनाओं को समझने और कांग्रेस राज में मुसलमान अधिक सुरक्षित होने के सवाल पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “नहीं देखिए हर नेता की, चाहे वह सत्ताधारी पार्टी में हो या विपक्ष में, यह जिम्मेदारी है कि वह अपने देश के हर धर्म की भावनाओं को समझे। हर नेता को यह समझना चाहिए।
मौलाना ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भी यह समझते हैं; उन्होंने कहा था कि वह मुस्लिम बच्चों के एक हाथ में कुरान और दूसरे हाथ में लैपटॉप देखना चाहते हैं। ये भावनाएं हैं, और हर किसी में ये होनी चाहिए। जहां तक इस बात का सवाल है कि क्या कांग्रेस के शासन में इस्लाम या मुसलमान सुरक्षित थे, तो मैं कहूंगा कि नहीं, वे सुरक्षित नहीं थे। अगर मुसलमान सुरक्षित होते, तो उन्होंने तरक्की की होती, आगे बढ़े होते, आईएएस और आईपीएस अधिकारी बने होते, नौकरियों में शामिल हुए होते और संसद व राज्य विधानसभाओं में पहुंचे होते। लेकिन कांग्रेस के शासनकाल में, जैसा कि 2005 की सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में देखा गया, यह कहा गया था कि मुसलमान दलितों से भी बदतर हालात में रह रहे थे। तो, मुसलमान कैसे सुरक्षित थे?”
साजिद रशीदी ने कहा कि कांग्रेस या जितनी भी तथाकथित पार्टियां हैं, सभी ने मुसलमानों को ठगा है। मुसलमानों का इस्तेमाल किया और सिर्फ वोटबैंक समझा है। इसलिए मेरा मानना है कि कांग्रेस के शासनकाल में मुसलमान सुरक्षित नहीं रहा। मुसलमान ने हर वो गलत काम किया, जो कानून और संविधान के खिलाफ है। यही कारण है कि मुस्लिम समुदाय शिक्षा में पीछे रहा। उन्होंने कहा कि आज मुसलमान शिक्षा की तरफ बढ़ रहा है, इसीलिए इस साल 53 बच्चे यूपीएससी में पास हुए हैं।
दोबारा से कांग्रेस के सत्ता में आने पर राष्ट्र गीत वंदे मातरम को लेकर कानून में बदलाव होने के सवाल पर मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “हमारा कहना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी इस बारे में सोचना चाहिए। चूंकि हम देश में दूसरी सबसे बड़ी आबादी हैं, तो क्या हमारी भावनाएं और हमारी मान्यताएं उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं? उन्हें हमारी मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए और सिर्फ अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर काम नहीं करना चाहिए। इसके बजाय, उन्हें हमारी आस्था का ध्यान रखना चाहिए। जो पंक्तियां हमारी आस्था के खिलाफ हैं, उनके बारे में संविधान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर कोई चीज किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, तो उसे उन पर थोपा नहीं जा सकता। इसलिए, उन छह पंक्तियों को हटा दिया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि मैं भाजपा से अनुरोध करता हूं कि इन छह पंक्तियों को हटा देना चाहिए। कांग्रेस इसको हटाएगी, यह तो तय है।
भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने प्रेस वार्ता कर सवाल उठाया है कि क्या राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सही चुनाव हैं? राष्ट्रगीत के विरोध करने पर राहुल गांधी और कांग्रेस को माफी नहीं मांगनी चाहिए?
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना रशीदी ने कहा कि हर आदमी राजनीति कर रहा है। आपने (भाजपा) ने छह पंक्तियों को राष्ट्रगीत में लाकर और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से वंदे मातरम को गवाकर राजनीति की है। आप राजनीति कर रहे हैं वंदे मातरम को प्रमोट करके। वो (कांग्रेस) राजनीति कर रहे हैं इसका खंडन करके। ऐसे में माफी मांगने जैसी क्या बात है। मौलाना ने कहा कि कांग्रेस को माफी नहीं मांगनी चाहिए। भाजपा के नेता और प्रवक्ता को चाहिए कि विपक्ष के नेता का सम्मान भी रखें।

