Wednesday, May 27, 2026
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दिल्ली पुलिस ने पेटीएम केवाईसी के नाम पर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया, 3 गिरफ्तार

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नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। साइबर जालसाजों द्वारा पेटीएम केवाईसी के नाम पर एक चाय बेचने वाले के साथ ठगी किए जाने के मामले में दिल्ली पुलिस की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर सेल ने एक अंतर-राज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में बैंक अकाउंट किट एटीएम कार्ड और सिम कार्ड की सप्लाई से जुड़े तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह खुद को पेटीएम कर्मचारी बताकर लोगों को निशाना बनाता था। आरोपी पीड़ितों के पास पहुंचकर उन्हें पेटीएम केवाईसी या सेटिंग अपडेट करने का झांसा देते थे और इसी बहाने उनके मोबाइल फोन तक पहुंच बना लेते थे। एक बार मोबाइल फोन पर नियंत्रण मिलने के बाद वे बैंक खाते से अवैध रूप से रकम ट्रांसफर कर लेते थे। इसी तरीके से दक्षिण पटेल नगर, दिल्ली में रहने वाले एक चाय विक्रेता के साथ भी ठगी हुई, जिसमें उसके बैंक खाते से लगभग 90,000 रुपये निकाल लिए गए।

शिकायत मिलने के बाद साइबर थाने ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती जांच में तकनीकी निगरानी, बैंक लेनदेन के विश्लेषण, लाभार्थी खातों की जांच और सीसीटीवी फुटेज की मदद ली गई। जांच में सामने आया कि ठगी की गई रकम एक पंजाब नेशनल बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी, जिसका इस्तेमाल आगे साइबर अपराध में किया जा रहा था।

लगातार डिजिटल ट्रेल और मोबाइल नंबरों के विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की। जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ था, जिसमें हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के लोग शामिल थे। पुलिस ने तकनीकी इनपुट और स्थानीय खुफिया जानकारी के आधार पर पंचकूला, ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में छापेमारी की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों में पंचकूला निवासी विशेष सिंह शामिल है, जिस पर बैंक खाता उपलब्ध कराने और साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाली किट सप्लाई करने का आरोप है। दूसरा आरोपी सचिन मौर्य है, जो कथित रूप से बैंक अकाउंट किट इकट्ठा करने और उन्हें आगे सप्लाई करने का काम करता था। तीसरा आरोपी आशीष शर्मा है, जो हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले का रहने वाला है और इस नेटवर्क में सप्लाई और संचालन से जुड़ी भूमिका निभा रहा था।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे कमीशन के बदले बैंक खाते, एटीएम कार्ड, रजिस्टर्ड सिम कार्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल्स उपलब्ध कराते थे। इनका इस्तेमाल आगे साइबर अपराधी ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और निकालने के लिए करते थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे वाट्सएप और इंस्टाग्राम के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में रहते थे और संगठित तरीके से इस पूरे नेटवर्क को संचालित करते थे।

पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और डिजिटल लेनदेन की आगे जांच कर रही है, ताकि पूरे साइबर फ्रॉड रैकेट का पूरी तरह से खुलासा किया जा सके।