देहरादून, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर उत्तराखंड कांग्रेस ने विरोध जताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पार्टी प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का हवाला देते हुए इस नियुक्ति पर सवाल उठाए। दोनों नेताओं ने कहा कि मामले से जुड़े गंभीर सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है और दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने से उत्तराखंड की भावनाएं आहत हुई हैं। कांग्रेस ने इस नियुक्ति के विरोध में गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास करने का ऐलान किया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को उत्तराखंड के जनमानस की भावनाओं का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने और अंकिता के माता-पिता की ओर से सीबीआई जांच की मांग किए जाने के संदर्भ में कई सवाल उठ रहे हैं। परिवार की मांग के मुताबिक मामले की जांच इस पहलू को ध्यान में रखकर होनी चाहिए कि कथित वीआईपी कौन था। जांच के सवालों का समाधान करने के बजाय दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त कर दिया गया। उन्होंने इसे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड की संवेदनाओं के प्रति असंवेदनशील रवैया बताया।
उन्होंने कहा कि विपक्षी दल के प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को सामने रखना उनकी जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से कांग्रेस ने गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास रखने का निर्णय लिया है। पार्टी के अन्य नेता दिल्ली में हैं और उनके लौटने के बाद बैठक कर आगे के विरोध कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर भी विरोध दर्ज कराया जा सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने भी दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तराखंड के स्वाभिमान और भावनाओं को चुनौती दे रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े सवालों और आरोपों की जांच की मांग के बीच दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पद क्यों दिया गया। अंकिता उत्तराखंड की बेटी और बहन थीं। अंकिता के परिवार के साथ प्रदेश के लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। इस मामले में न्याय की मांग अब भी बनी हुई है और अंकिता के माता-पिता को जवाब मिलना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि गांधी पार्क में मौन उपवास विरोध की शुरुआत है। पार्टी नेतृत्व की बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी और केंद्र सरकार तक उत्तराखंड के लोगों की नाराजगी पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे।
