इंफाल, 3 सितंबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इंफाल सब-जोनल ऑफिस ने मणिपुर के कुख्यात ‘सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज’ मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने 2 सितंबर को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी करते हुए सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज, स्मार्ट सोसाइटी और उनसे जुड़ी संस्थाओं व व्यक्तियों की 14.69 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है। जब्त संपत्तियों में जमीन, इमारतें, प्लांट और मशीनरी और औद्योगिक और कमर्शियल इकाइयां शामिल हैं।
यह जांच मणिपुर पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर यामबेम बिरेन, जो खुद को ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का मुख्यमंत्री’ बताता था, और नरेनगबम समरजीत, जो खुद को ‘मणिपुर स्टेट काउंसिल का विदेश और रक्षा मंत्री’ बताता था, के खिलाफ दर्ज की गई थी। आरोप था कि दोनों ने भारत संघ से मणिपुर राज्य की आजादी की घोषणा कर राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने, राजद्रोह और अलग-अलग समूहों के बीच अशांति व दुश्मनी फैलाने जैसे देश विरोधी काम किए।
इस मामले में एनआईए ने समरजीत सिंह, वाई. बिरेन और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बिना किसी कानूनी अधिकार या लाइसेंस के स्मार्ट सोसाइटी और सलाई ग्रुप ऑफ कंपनीज के जरिए लोगों से धोखाधड़ी करके पैसे जमा किए। लोगों को सालाना 36 प्रतिशत रिटर्न का लालच दिया गया। इस फंड को ग्रुप की 19 कंपनियों के जरिए लॉन्डर किया गया और इसका इस्तेमाल अलगाववादी गतिविधियों में किया गया।
‘सलाई फाइनेंशियल सर्विसेज’ (एसएएफएफआईएनएस) बॉम्बे मनी लेंडर्स एक्ट, 1946 के तहत रजिस्टर्ड थी, जिसके तहत उसे सिर्फ पैसे उधार देने की इजाजत थी, न कि लोगों से डिपॉजिट लेने की। आरोपियों ने इस रजिस्ट्रेशन का गलत इस्तेमाल कर आरबीआई की मंजूरी के बिना बैंक / एनबीएफसी की तरह काम किया। जमा किए गए पैसे को डायरेक्टर्स और ग्रुप कंपनियों के अकाउंट्स के जरिए घुमाया गया। सीबीआई ने भी इसे गैर-कानूनी पोंजी / मनी-सर्कुलेशन रैकेट बताते हुए एफआईआर दर्ज की थी।
ई़़डी की जांच में अपराध से हुई कुल कमाई 76.63 करोड़ रुपए आंकी गई है, जो बिना कानूनी अधिकार के लोगों से जमा किया गया कैश है। इस रकम का इस्तेमाल बिजनेस खर्च, संपत्ति और मशीनरी खरीदने, विदेश में पैसे भेजने, कस्टम ड्यूटी, इनकम टैक्स, डायरेक्टरों की विदेश यात्रा, क्रेडिट कार्ड पेमेंट और कर्मचारियों के जरिए कैश निकालने में किया गया।
इससे पहले 17 मई 2022 को सलाई मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के अकाउंट में मौजूद 11.26 लाख रुपए और 09 नवंबर 2022 को सलाई एग्री कंसोर्टियम के अकाउंट में मौजूद 2.32 करोड़ रुपए अटैच किए गए थे। 13 मार्च 2026 को अपराध की आय से खरीदी गई 50.80 करोड़ की 28 अचल और 5 चल संपत्तियां भी जब्त की गई थीं। अब तक इस मामले में कुल 67.92 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की जा चुकी हैं। ई़डी ने बताया कि आगे की जांच जारी है।
