तेल अवीव, 27 अप्रैल (आईएएनएस)। हाल ही में लेबनान से इजरायली डिफेंस फोर्स के सैनिक की एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी, जिसने सबका ध्यान खींचा। तस्वीर में आईडीएफ सैनिक ईसा मसीह की मूर्ति को खंडित करते नजर आ रहे हैं। इजरायली सैनिक की इस हरकत की कड़ी आलोचना हुई। इसके कुछ समय बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आईडीएफ यूनिट के अलग-अलग रेंज के क्रिश्चियन सैनिक और कमांडर से मुलाकात की।
पीएम नेतन्याहू ने मुलाकात की एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की और कहा, “कल मैं अपने ऑफिस में युवा लड़के और लड़कियों के एक बहुत अच्छे समूह से मिला। ये आईडीएफ यूनिट्स की अलग-अलग रेंज के क्रिश्चियन सैनिक और कमांडर हैं। वे हमारी मिलिट्री में अहम भूमिका निभाते हैं। वे बहुत लगन से काम करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “यह सच्चाई उससे बिल्कुल अलग है जो अक्सर बाहर दिखाई जाती है। इजरायल न केवल मिडिल ईस्ट में ईसाइयों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह उन ईसाई सैनिकों का भी घर है जो अपने साथी सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इजरायल और पूरे इलाके में अपने ईसाई भाई-बहनों की रक्षा करते हैं।”
पीएम नेतन्याहू ने आईडीएफ सैनिकों की सराहना करते हुए कहा, “मैंने उनकी निजी कहानियां सुनीं। उनकी प्रतिबद्धता, उनका त्याग और उन्होंने जो रास्ता चुना। मैं बहुत प्रभावित हुआ। इजरायल मिडिल ईस्ट का एकमात्र ऐसा देश है जहां ईसाई समुदाय न केवल सुरक्षित रहता है, बल्कि फलता-फूलता है, बढ़ता है और सफल होता है। मैं आपको सलाम करता हूं। आपकी सेवा, आपकी हिम्मत और इजरायल देश के लिए आपके जबरदस्त योगदान के लिए धन्यवाद।”
बता दें, ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ने के मामले में विदेश मंत्री गिडियन सार को माफी मांगनी पड़ी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “मुझे भरोसा है कि जिसने यह गंदी हरकत की है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हम इस घटना के लिए उन सभी ईसाई लोगों से माफी मांगते हैं, जिनकी भावनाएं आहत हुई।” वहीं आईडीएफ की तरफ से इस मामले में जांच के बाद कठोर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।

