नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। पनुन कश्मीर के चेयरमैन टीटो गंजू ने बारामूला में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर दिए गए बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बयान भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ है तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत इसकी जांच होनी चाहिए। गंजू ने कहा कि यह एक संज्ञेय अपराध है और इस पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पनुन कश्मीर के चेयरमैन टीटो गंजू ने बारामूला में फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान और कश्मीर पर बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह हमारे हिसाब से बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) है और हमारा दंड संहिता कानून है, उसमें धारा 152 की अवहेलना का मामला बनता है। हमारा मानना है कि इस धारा के सभी आवश्यक तत्व इस मामले में पूरे होते हैं। इसकी जांच होनी चाहिए। यह एक संज्ञेय अपराध है और इस पर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अभी ऑपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है। ऐसे समय में आप पाकिस्तान को कवर फायर दे रहे हैं, भारत की एकता और अखंडता को चुनौती दे रहे हैं और लोगों को उकसा रहे हैं कि वे सड़कों पर उतर आएं। इसका क्या अर्थ है? ये तीनों गैरकानूनी बयान हैं और संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं।
टीटो गंजू ने कहा कि इसलिए हमारा मानना है कि केवल इस घटना ही नहीं, बल्कि इनके द्वारा दिए गए बयानों की भी जांच होनी चाहिए। हम शुरू से कहते आए हैं कि इनके पूरे सार्वजनिक जीवन और गतिविधियों की जांच होनी चाहिए। नेशनल कॉन्फ्रेंस की भूमिका क्या रही है, यह भी सामने आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमें शुरू से विश्वास रहा है कि इनकी भूमिका संदिग्ध रही है। इनके साथ किस प्रकार का व्यवहार हुआ और इन्होंने किस प्रकार की भूमिका निभाई, यह सब जांच का विषय है। इतनी राजनीतिक समझ और अनुभव रखने वाला कोई वरिष्ठ राजनेता इस प्रकार का बयान यूं ही नहीं दे सकता। उनकी बातों का एक महत्व और प्रभाव होता है। इसके बावजूद ऐसा बयान देना गंभीर विषय है।
टीटो गंजू ने कहा कि एक और महत्वपूर्ण बात है। मुझे संख्या याद नहीं है, लेकिन उन्होंने स्वयं उस समय कहा था कि जब कश्मीर में आतंकवाद अपने चरम पर था, जब कश्मीरी पंडितों के साथ नरसंहार जैसी घटनाएं हुईं और उन्हें घाटी छोड़नी पड़ी, तब वे कहां थे? सबसे पहले तो वही वहां से चले गए थे। ऐसे व्यक्ति को इस प्रकार के दावे करने या किसी की शहादत का श्रेय लेने का कोई अधिकार नहीं बनता।
उन्होंने कहा कि जहां तक शिकायत का सवाल है, हमने शिकायत दर्ज करा दी है। एफआईआर दर्ज करना पुलिस का कार्य है। कानूनी दृष्टि से उन्हें यह करना चाहिए। जैसा कि मैंने पहले भी कहा, सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि यदि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलती है तो एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। इसलिए उन्हें एफआईआर दर्ज करनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया जाता तो हमारे पास कानून के अन्य प्रावधान भी उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग करते हुए हम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
