दिसपुर, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी जोनल ऑफिस-I ने ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ (पीएमएलए), 2002 के तहत एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया है। इसके तहत एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, फेडरल बैंक, इंडसइंड बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में मौजूद 43 बैंक खातों में जमा कुल लगभग 2.12 करोड़ रुपए की राशि को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। यह मामला गुवाहाटी के एक सीनियर सिटिजन के साथ ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए किए गए साइबर फ्रॉड से जुड़ा है।
ईडी ने इस मामले की जांच साइबर पुलिस स्टेशन, सीआईडी, असम और गुवाहाटी द्वारा अज्ञात साइबर फ्रॉड करने वालों के खिलाफ ‘भारतीय न्याय संहिता’, 2023 और ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’, 2000 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी।
जांच से पता चला है कि सितंबर और दिसंबर 2025 के बीच टीआरएआई, मुंबई क्राइम ब्रांच और सीबीआई के अधिकारी बनकर साइबर फ्रॉड करने वालों ने गुवाहाटी के रहने वाले एक सीनियर सिटीजन से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें झूठा यकीन दिलाया कि उनके आधार कार्ड से खुला एक बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल है और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा।
उन्हें बनावटी अदालती कार्यवाही और एक फर्जी ‘डिजिटल अरेस्ट वारंट’ दिखाया गया। हर दो घंटे में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए मजबूर किया गया और धमकी दी गई कि अगर उन्होंने किसी को इस मामले के बारे में बताया तो उन्हें ‘नेशनल सिक्योरिटी एक्ट’ के तहत हिरासत में ले लिया जाएगा।
परिवार के फंड की ‘आरबीआई जांच’ और बाद में एक फर्जी ‘बेल बॉन्ड’ के बहाने पीड़ित को धोखेबाजों द्वारा बताए गए बैंक खातों में 19 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल लगभग 2.13 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया। इसके लिए उन्होंने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और शेयर बेच दिए और अपने पेंशन अकाउंट और इंश्योरेंस पॉलिसी के बदले लोन लिया।
आगे की जांच से पता चला है कि ठगी गई रकम को पहले-लेवल के म्यूल खातों में जमा किया गया और तुरंत ही इसे देश भर में व्यक्तियों, फर्मों और कंपनियों के कई बैंक खातों के जरिए अलग-अलग हिस्सों में बांटकर घुमाया गया। इसके बाद, पैसे के रास्ते को छिपाने के लिए जानबूझकर और व्यवस्थित तरीके से इस रकम को कैश में निकाला गया, डिजिटल करेंसी में बदला गया, पेमेंट गेटवे में ट्रांसफर किया गया या दूसरे खातों में भेजा गया।
इन खातों में हुए लेन-देन, खाताधारकों की बताई गई प्रोफाइल से बिल्कुल अलग पाए गए। इससे पता चलता है कि साइबर धोखाधड़ी करने वाले गिरोह द्वारा धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होने वाले खाते का एक संगठित नेटवर्क चलाया जा रहा था।
पैसे के लेन-देन के रास्ते का पता लगाकर, ईडी ने 43 ऐसे बैंक खातों की पहचान की, जिनके जरिए अपराध से मिली रकम का लेन-देन किया गया था और जिनमें अभी भी बैलेंस मौजूद था। अपराध से मिली रकम को पीएमएलए, 2002 की धारा 5(1) के तहत अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है। वहीं, ईडी की ओर से आगे की जांच जारी है।
