नई दिल्ली, 22 अक्टूबर (आईएएनएस)। तिब्बत में गुरुवार रात करीब 8:03 बजे रिक्टर पैमाने पर 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। यह भूकंप ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र पिछले महीने आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) से उबरने की कोशिश कर रहा है।
भारत के राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 173 किलोमीटर की गहराई में था। इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित था।
इससे पहले 3 सितंबर को भी तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसकी गहराई करीब 14 किलोमीटर थी।
वहीं, जनवरी 2025 में चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के अनुसार 6.8 तीव्रता का एक बड़ा भूकंप आया था, जिसमें 120 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और लगातार बढ़ रही चरम मौसम संबंधी घटनाएं चिंगहाई-तिब्बत पठार में प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को और बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ताजा भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है, जहां लोग अभी हाल की आपदाओं के प्रभावों से जूझ रहे हैं।
यह भूकंप उस विनाशकारी घटना के कुछ सप्ताह बाद आया है, जब 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के बड़े हिमस्खलन के कारण भीषण फ्लैश फ्लड आई थी।
इस बाढ़ में कई घर, सड़कें और पुल बह गए थे। जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा था और हजारों लोग लापता हो गए थे। प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक तबाही मची थी।
नेपाल में इस आपदा में कम से कम 1,455 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 5,285 लोग लापता बताए गए थे, जब अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान समाप्त किया। नेपाल का अनुमान है कि शुरुआती राहत और पुनर्वास कार्यों के लिए करीब 5 अरब डॉलर की जरूरत होगी।
वहीं, तिब्बत की ओर चीन के सरकारी मीडिया ने 43 लोगों की मौत और 500 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी दी थी।
पहले की रिपोर्टों में लापता लोगों की संख्या 558 बताई गई थी, जिनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों से सीमित जानकारी मिलने के कारण तबाही के वास्तविक स्तर का स्वतंत्र रूप से आकलन करना मुश्किल बना हुआ है।
