नई दिल्ली, 1 अगस्त (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई) लागू होने के पहले ही वर्ष में 72 लाख से अधिक पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी औपचारिक कार्यबल (फॉर्मल वर्कफोर्स) से जुड़े हैं। सरकार ने शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि यह योजना सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ नियोक्ताओं को नए रोजगार सृजित करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
सरकार के अनुसार, योजना के लाभार्थियों में करीब 30 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि 15 लाख से अधिक लोगों को रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन राशि पहले ही मिल चुकी है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकरण और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के साथ रोजगार को जोड़कर पीएम-वीबीआरवाई देश के संगठित श्रम बाजार को मजबूत बना रही है और अधिक सुरक्षित कार्यबल तैयार करने में मदद कर रही है।
पारदर्शी और ईपीएफओ द्वारा संचालित इस व्यवस्था के जरिए कार्यबल के औपचारिककरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
यह योजना अगस्त 2025 में घोषित की गई थी और 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 तक लागू रहेगी। इसके लिए सरकार ने 99,446 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।
योजना का लक्ष्य 3.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है, जिनमें 1.92 करोड़ पहली बार नौकरी पाने वाले कर्मचारी शामिल हैं। यह योजना युवाओं को ईपीएफओ पंजीकरण के माध्यम से संगठित क्षेत्र में रोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। साथ ही, विशेष रूप से श्रम-प्रधान विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का भी उद्देश्य रखती है। यह राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन के साथ मिलकर नए और विस्तार कर रहे उद्योगों में रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देती है।
पीएम-वीबीआरवाई दो हिस्सों वाली प्रोत्साहन व्यवस्था पर आधारित है। इसके तहत प्रति माह 1 लाख रुपए तक वेतन पाने वाले पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को उनके एक महीने के ईपीएफ वेतन के बराबर, अधिकतम 15,000 रुपए तक का एकमुश्त प्रोत्साहन दिया जाता है।
यह राशि दो किस्तों में जारी की जाती है। पहली किस्त 6 महीने की नौकरी पूरी होने के बाद और दूसरी किस्त लगातार 12 महीने सेवा देने तथा वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम पूरा करने के बाद दी जाती है। प्रोत्साहन राशि का एक हिस्सा निर्धारित बचत साधन में निवेश किया जाता है, जिसे कर्मचारी बाद में निकाल सकते हैं। इससे बचत की आदत और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है।
वहीं, नियोक्ताओं को प्रत्येक पात्र अतिरिक्त कर्मचारी, जिसे कम से कम छह महीने तक नौकरी पर रखा जाता है, के लिए दो वर्षों तक प्रति माह 3,000 रुपए तक का प्रोत्साहन मिलता है। इससे कंपनियों की भर्ती लागत कम होती है और लंबे समय तक रोजगार बनाए रखने को बढ़ावा मिलता है। यह लाभ उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है, जिनका मासिक वेतन 1 लाख रुपये तक है।
सरकार ने विनिर्माण क्षेत्र की रोजगार क्षमता को देखते हुए इस क्षेत्र के लिए प्रोत्साहन अवधि को तीसरे और चौथे वर्ष तक भी बढ़ाया है, ताकि अधिक से अधिक रोजगार सृजित किए जा सकें।

