Wednesday, June 10, 2026
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महाराष्ट्र सरकार ने कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए विभागों की संख्या बढ़ाकर 45 कर दी

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मुंबई, 9 जून (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए राज्य के विभिन्न मंत्रालयी विभागों का पुनर्गठन किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रशासनिक विभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 45 की जाएगी।

सरकार के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को तेज करने और कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से उठाया गया है। इस पुनर्गठन के तहत कई उप-विभागों को स्वतंत्र विभाग का दर्जा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस नीति को ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ की अवधारणा पर आधारित बताया है। सरकार का मानना है कि इससे शासन व्यवस्था में समन्वय बेहतर होगा और क्षेत्रीय एजेंसियों के साथ कामकाज अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

पहले मंत्रालय में 33 विभाग कार्यरत थे, जिनमें कई विभागों के भीतर दो से तीन उप-विभाग शामिल थे। एक ही विभाग प्रमुख के अधीन विभिन्न उप-विभाग होने के कारण मानव संसाधन के वितरण और प्रशासनिक कामकाज में कठिनाइयां आती थीं।

नए ढांचे के तहत उप-विभागों को स्वतंत्र सचिवों के अधीन अलग विभाग बनाया जाएगा। प्रत्येक नए विभाग को अपना स्वतंत्र प्रशासनिक ढांचा, नकद शाखा और रजिस्ट्रेशन शाखा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पुनर्गठन में किसी नए पद का सृजन नहीं किया जाएगा। मौजूदा स्वीकृत और रिक्त पदों का ही पुनर्वितरण नए विभागों में अनुपातिक रूप से किया जाएगा।

इस बदलाव से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना प्रशासनिक सुधार, नवाचार, उद्यमिता और सुधार उप-विभाग द्वारा जारी की जाएगी।

इसके अलावा, मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 में संशोधन को भी मंजूरी दी है। यह संशोधन शैक्षणिक वर्ष 2026–27 के लिए नए कॉलेजों की अंतिम स्वीकृति, नए संकाय, पाठ्यक्रम, विषय और विस्तार से संबंधित है।

इसके साथ ही, केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम के अनुरूप महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम, 2017 में भी संशोधन को मंजूरी दी गई है, ताकि राज्य और केंद्र के कर प्रावधानों में समानता बनी रहे।

मंत्रिमंडल ने महाराष्ट्र औद्योगिक विकास अधिनियम, 1961 में संशोधन को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम की उधारी सीमा बढ़ाई जाएगी।

सरकार ने पहले ही महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम के लिए 6,000 करोड़ रुपए के ऋण को मंजूरी दी है, जिसका उपयोग पुरंदर हवाई अड्डा परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में किया जा रहा है।