Tuesday, August 4, 2026
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शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई, सीबीआई जांच की मांग

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अमरावती, 4 अगस्त (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार को शिक्षकों की भर्ती के लिए ‘मेगा डीएससी-2025’ में अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के आदेश की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई की।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट और आंध्र प्रदेश के पूर्व एडवोकेट जनरल एस. श्रीराम सुब्रह्मण्यम ने हाईकोर्ट से पूरी भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच का आदेश देने का आग्रह किया।

उन्होंने तर्क दिया कि अनियमितताएं कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं थीं, बल्कि एक ऐसी व्यवस्थागत विफलता की ओर इशारा करती थीं जिससे भर्ती की निष्पक्षता और ईमानदारी प्रभावित हुई। दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद के लिए तय कर दी।

श्रीराम ने तर्क दिया कि सरकार ने मेगा डीएससी-2025 नोटिफिकेशन जारी करने से ठीक पहले स्पोर्ट्स कोटा पॉलिसी में बड़े बदलाव किए। उन्होंने बताया कि स्पोर्ट्स कोटा के तहत आरक्षण 2 से बढ़ाकर 3 प्रतिशत कर दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि प्रवेश परीक्षा पास करने की शर्त हटा दी गई थी।

वकील के अनुसार, इन बदलावों से उम्मीदवारों के एक पहले से तय समूह को फायदा हुआ और ये बदलाव बिना पारदर्शिता के किए गए थे। कई उम्मीदवारों को ऐसे स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट के आधार पर नियुक्तियां मिलीं जो तय पात्रता नियमों को पूरा नहीं करते थे। उन्होंने कोर्ट के सामने सर्टिफिकेट के कुछ नमूने पेश किए और तर्क दिया कि कुछ उम्मीदवारों ने मान्यता प्राप्त राज्य या राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के बजाय केवल स्थानीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। उन्होंने कहा कि ये उदाहरण अनियमितताओं के एक पैटर्न को दिखाते हैं, न कि अलग-थलग गलतियों को।

श्रीराम ने बताया कि जनता की आलोचना के बाद सरकार ने बाद में स्पोर्ट्स कोटा से संबंधित सरकारी आदेश वापस ले लिए। उनके अनुसार, इस वापसी ने ही पॉलिसी में बदलावों पर गंभीर सवाल खड़े किए और एक स्वतंत्र जांच की जरूरत को सही ठहराया।

वकील ने कोर्ट को बताया कि जिन जानकारियों का इस्तेमाल किया गया, उनमें से ज्यादातर ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) आवेदनों और अन्य सार्वजनिक स्रोतों से हासिल की गई थीं। उन्होंने बताया कि कोर्ट के सामने केवल कुछ उदाहरण ही पेश किए गए क्योंकि सरकार ने पूरी मेरिट लिस्ट प्रकाशित नहीं की थी।

यह कहते हुए कि कई प्रभावित उम्मीदवार कानूनी कार्रवाई और डराए-धमकाए जाने के डर से कोर्ट नहीं आए। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकारी संचार ने भर्ती प्रक्रिया से संबंधित आरोपों को प्रकाशित करने से हतोत्साहित किया और उन्होंने कोर्ट के सामने सहायक सामग्री पेश करने का भरोसा दिलाया।

याचिकाकर्ता की राजनीतिक संबद्धता के बारे में बात करते हुए वकील ने कहा कि पीआईएल व्यापक जनहित में दायर की गई थी क्योंकि यह मुद्दा हजारों शिक्षक उम्मीदवारों को प्रभावित करता है। उन्होंने तर्क दिया कि जहां व्यक्तिगत रिट याचिकाएं व्यक्तिगत शिकायतों का समाधान कर सकती हैं। वहीं केवल एक पीआईएल ही भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले व्यवस्थागत मुद्दों की जांच की मांग कर सकती है।