Saturday, June 13, 2026
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नीति आयोग की बैठक में सीएम पेमा खांडू ने उठाए अरुणाचल प्रदेश के विकास से जुड़े अहम मुद्दे

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ईटानगर, 12 जून (आईएएनएस)। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने राज्य की विकास संबंधी चुनौतियों और रणनीतिक जरूरतों को लेकर केंद्र सरकार से विशेष सहयोग और नीतिगत समर्थन की मांग की। शुक्रवार को नीति आयोग द्वारा आयोजित पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के कारण पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी, बुनियादी ढांचे और लोगों के विश्वास में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे विकास और निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं।

बैठक में पेमा खांडू ने कहा कि क्षेत्रफल के हिसाब से पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और बिखरी हुई आबादी के कारण कई विकासात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष बुनियादी ढांचा सहायता की जरूरत बताई।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य ने वर्ष 2047 तक 40,000 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन्होंने नीति आयोग और केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से समन्वित सहयोग की मांग की। उन्होंने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए कौशल विकास और सहायक उद्योगों को बढ़ावा देना भी जरूरी है।

वित्तीय संसाधनों के आवंटन को लेकर पेमा खांडू ने जनसंख्या आधारित फंडिंग व्यवस्था की समीक्षा की मांग की। उनका कहना था कि कम आबादी लेकिन बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले राज्यों को मौजूदा व्यवस्था में नुकसान होता है। उन्होंने क्षेत्रफल, दुर्गम भूभाग और रणनीतिक महत्व को भी फंडिंग का आधार बनाने का सुझाव दिया।

कनेक्टिविटी के मुद्दे पर उन्होंने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का दायरा बढ़ाकर 250 या उससे अधिक आबादी वाले गांवों तक करने की मांग की। उन्होंने बताया कि वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम की सफलता के बावजूद कई दूरदराज के गांव अब भी सड़क संपर्क से वंचित हैं।

पेमा खांडू ने यह भी कहा कि अरुणाचल प्रदेश को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की तुलना में बाहरी सहायता प्राप्त परियोजनाओं का कम लाभ मिला है। उन्होंने इस अंतर को दूर करने के लिए विशेष व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया।

बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग अरुणाचल’ की स्थापना की जानकारी देते हुए इसे एक प्रमुख नीति एवं प्रशासनिक थिंक टैंक बनाने के लिए नीति आयोग से मार्गदर्शन मांगा।

उन्होंने “सरकार आपके द्वार”, “सेवा आपके द्वार” और “कैबिनेट आपके द्वार” जैसी पहलों का भी जिक्र किया, जिनके जरिए सरकारी सेवाएं सीधे दूरस्थ गांवों तक पहुंचाई जा रही हैं।

बैठक में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने अरुणाचल प्रदेश की मानव संसाधन क्षमता की सराहना की और बड़े जलविद्युत परियोजना समूहों के सहयोग से आईटीआई को मजबूत करने का सुझाव दिया।