बांग्लादेश में बढ़ता इस्लामिक कट्टरपंथ सुरक्षा एजेंसियों के लिए बना चुनौती

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ढाका, 7 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ और उग्रवाद एक बार फिर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में सुरक्षा एजेंसियों को संभावित आतंकी हमलों के इनपुट मिले हैं, जिसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। माना जा रहा है कि यह संकट पूर्व अंतरिम सरकार की कथित विफलताओं और सुरक्षा तंत्र की कमजोरी से जुड़ा हुआ है।

स्थानीय अखबार ढाका ट्रिब्यून में प्रकाशित एक संपादकीय के मुताबिक, पुलिस मुख्यालय ने संसद भवन, सुरक्षा प्रतिष्ठानों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक क्षेत्रों पर संभावित हमलों की आशंका जताई है। यह अलर्ट एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन सदस्य की गिरफ्तारी के बाद जारी किया गया, जिसने दो बर्खास्त सैन्य अधिकारियों से संपर्क होने का दावा किया था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के जुलाई आंदोलन और उसके बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के पतन के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था काफी कमजोर हो गई है । इस दौरान हिंसा, लूटपाट और जेलों से बड़े पैमाने पर कैदियों के फरार होने की घटनाएं सामने आईं। एक अनुमान के अनुसार इस दौरान 70 से अधिक कट्टरपंथी कैदी जेल से भाग निकले।

अंतरिम सरकार के दौरान कई अपराधियों और उग्रवादी संगठनों से जुड़े लोगों को जमानत मिली, इसका उल्लेख भी रिपोर्ट में किया गया है। इनमें 2013 में ब्लॉगर और शाहबाग आंदोलन के कार्यकर्ता राजीब हैदर की हत्या के आरोपी जशीमुद्दीन रहमानी की रिहाई को सबसे चिंताजनक बताया गया है।

इसके अलावा, 2009 में प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश ने भी फिर से सक्रियता दिखाई। संगठन ने इस्लामिक खिलाफत की मांग करते हुए प्रदर्शन किए, जिनमें कुछ युवाओं द्वारा आईएसआईएस का झंडा भी लहराया गया था।

रिपोर्ट में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि उनके शासन में कट्टरपंथी तत्वों को खुलकर सक्रिय होने का मौका मिला। विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती उग्रवादी गतिविधियां केवल देश के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं।