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बांग्लादेश में खसरा वैक्सीन की खरीद और वितरण में गड़बड़ी की होगी जांच

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ढाका, 5 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेश की सरकार ने पूर्व अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान खसरा (मीजल्स) के टीकों की खरीद और वितरण में हुई कथित अनियमितताओं तथा प्रशासनिक विफलताओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग इन गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करेगा।

बांग्लादेश के समाचार पत्र ‘द डेली स्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की अध्यक्षता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मामून रहमान करेंगे। आयोग में बांग्लादेश कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन्स (बीसीपीएस) के अध्यक्ष मावदुद हुसैन आलमगीर और स्वास्थ्य सेवा प्रभाग के अतिरिक्त सचिव एबीएम मोइनुल इस्लाम भी शामिल हैं।

आयोग 8 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2026 के बीच जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करेगा। उसे 60 कार्यदिवसों के भीतर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच के दौरान आयोग को बांग्लादेश में किसी भी स्थान का निरीक्षण करने और किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने का अधिकार दिया गया है।

आयोग खसरा वैक्सीन की खरीद और वितरण में हुई देरी, अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं के कारणों का पता लगाएगा। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी उपाय भी सुझाएगा। स्वास्थ्य सेवा प्रभाग आयोग को सचिवालय संबंधी सहायता उपलब्ध कराएगा।

इस साल अगस्त में कनाडा स्थित अंतरराष्ट्रीय संगठन ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (जीसीडीजी) ने बांग्लादेश में 2026 में फैले खसरे के प्रकोप को हाल के इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया था। संगठन ने अपनी रिपोर्ट ‘प्रिवेंटेबल ट्रेजेडी: बांग्लादेश्स 2026 मीजल्स आउटब्रेक’ में कहा था कि खसरा एक ऐसा रोग है, जिसे टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आम लोगों को खसरे का प्रकोप अचानक हुआ संकट लग सकता है, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से यह अप्रत्याशित नहीं था। इसके पीछे 2024-2025 के दौरान टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई रुकावटें, नियमित टीकाकरण में चूक, निर्धारित पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों को रद्द करना, टीकों की खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले आबादी समूहों की समय पर पहचान नहीं कर पाना प्रमुख कारण रहे।

जीसीडीजी ने बताया कि बांग्लादेश लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के जरिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से स्वीकृत टीके खरीदता रहा था। हालांकि, अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था को बदलकर खुली निविदा प्रक्रिया के जरिए टीकों की खरीद का फैसला किया।

रिपोर्ट में यूनिसेफ के हवाले से कहा गया कि संगठन ने 2024 से 2026 के बीच पांच से छह औपचारिक पत्रों और करीब 10 बैठकों के माध्यम से अंतरिम सरकार को संभावित वैक्सीन की कमी के बारे में बार-बार आगाह किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए हर साल विभिन्न टीकों की करीब सात करोड़ खुराक की जरूरत होती है, लेकिन अगस्त से नवंबर 2025 के बीच यूनिसेफ की अग्रिम वित्तीय सहायता से केवल 1.78 करोड़ खुराक ही खरीदी जा सकीं। यूनिसेफ ने बताया था कि धन आवंटित होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया के तरीके को लेकर अनिर्णय और लंबी खुली निविदा प्रक्रिया के कारण समय पर टीकों की खरीद संभव नहीं हो पाई।

बांग्लादेशी समाचार पत्र ‘समकाल’ की ओर से प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (ईपीआई) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जीसीडीजी ने कहा कि 2025 में खसरा टीकाकरण का कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गया था। यह 2017 से 2025 के बीच दर्ज किया गया सबसे निचला स्तर था।

रिपोर्ट में कहा गया कि डब्ल्यूएचओ ने बाद में बांग्लादेश में 2024-2025 के दौरान खसरा-रूबेला (एमआर) वैक्सीन का देशव्यापी स्टॉक खत्म होने और नियमित टीकाकरण में कमी को बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने तथा 2026 में खसरे के प्रकोप का प्रमुख कारण बताया।

जीसीडीजी के अनुसार, खसरे का देशव्यापी प्रसार केवल वैक्सीन की कमी का नतीजा नहीं था, बल्कि इसमें स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर कई विफलताएं शामिल थीं। इनमें टीकों की खरीद, परिवहन और आपूर्ति में बाधाएं, वैक्सीन का स्टॉक खत्म होना, ईपीआई टीकाकरण सत्र रद्द होना, एमआर1 और एमआर2 टीकाकरण कवरेज में गिरावट, निर्धारित टीके नहीं लगवा पाने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या और पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों का अभाव शामिल है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार ने इस साल सत्ता में आने के बाद पहले से ज्ञात और मापे जा सकने वाले जोखिमों के बावजूद समय पर और प्रभावी कदम नहीं उठाए।