नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में हर शनिवार को होने वाला ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह 7 नवंबर से सुबह 8 बजे से 9 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान जारी किया गया।
यह नया समय, सर्दियों के लिए तय किए गए वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा है। इस पारंपरिक समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की सटीकता, अनुशासन और विरासत की झलक देखने को मिलती है। दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में होने वाले ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह का गर्मियों का समय सुबह 7:30 बजे से 8:30 बजे तक था।
यह समारोह राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित किया जाता है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं, जिनमें पर्यटक, छात्र और आम नागरिक शामिल होते हैं। वे मार्च करते सैनिकों के दस्तों, मिलिट्री बैंड और अलग-अलग यूनिटों के बीच औपचारिक रूप से जिम्मेदारियों के हस्तांतरण के इस शानदार नजारे को देखने आते हैं।
‘चेंज ऑफ गार्ड’ एक औपचारिक सैन्य समारोह है, जो दुनिया भर की कई प्रमुख जगहों पर आयोजित किया जाता है। इनमें लंदन का बकिंघम पैलेस, दिल्ली का राष्ट्रपति भवन और अमेरिका के अर्लिंग्टन में ‘टॉम्ब ऑफ द अननोन सोल्जर’ (अज्ञात सैनिक की समाधि) शामिल हैं।
यह समारोह परंपरा को दर्शाता है, जिसमें सैनिक एक भव्य सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान औपचारिक रूप से अपनी जिम्मेदारियां दूसरों को सौंपते हैं। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में 30 मिनट का यह ‘चेंज ऑफ गार्ड’ समारोह हर शनिवार सुबह आयोजित किया जाता है। अगर शनिवार को कोई सरकारी छुट्टी (गजेटेड हॉलिडे) हो, या राष्ट्रपति भवन की ओर से ऐसा कोई निर्देश दिया जाए, तो उस दिन यह समारोह आयोजित नहीं किया जाता है।
‘चेंज ऑफ गार्ड’ एक सैन्य परंपरा है। इसके तहत महलों, किलों और रक्षा प्रतिष्ठानों पर तैनात गार्ड और संतरी समय-समय पर बदले जाते हैं, ताकि सैनिकों की एक नई टुकड़ी कार्यभार संभाल सके। राष्ट्रपति भवन में, ‘सेरेमोनियल आर्मी गार्ड बटालियन’ भारत के राष्ट्रपति के लिए औपचारिक गार्ड और संतरी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाती है।
समय के साथ, इस समारोह में कई बदलाव किए गए हैं और इसकी जगह भी बदली गई है, ताकि यह देखने में और भी आकर्षक लगे और आम लोगों के लिए अधिक सुविधाजनक हो। इसमें राष्ट्रपति अंगरक्षक (पीबीजी) द्वारा अपनी पारंपरिक औपचारिक पोशाक में घुड़सवारी प्रदर्शन को शामिल किया गया है। साथ ही, कार्यक्रम स्थल को बदलकर राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट (सामने के प्रांगण) में कर दिया गया है, जहां आम जनता की पहुंच आसान हो गई है।
समारोह की शुरुआत पीबीजी के जवानों से होती है, जो सजे-धजे, ताकतवर और अच्छी तरह से तैयार किए गए घोड़ों पर सवार होकर ‘जयपुर कॉलम’ के पीछे से आगे आते हैं। इस दौरान आर्मी ब्रास बैंड धुन बजाता है। इसके बाद, परेड कमांडर आते हैं, जिनके आदेश पर गार्ड आगे बढ़ते हैं।
निरीक्षण के बाद, नया गार्ड पुराने गार्ड के साथ अपनी जगह लेता है और दोनों गार्ड एक-दूसरे को ‘नेशनल सैल्यूट’ देते हैं। इसके बाद नया गार्ड पहरेदारों और संतरियों की जिम्मेदारियां संभाल लेता है। समारोह का समापन पीबीजी के घुड़सवारी प्रदर्शन और राष्ट्रगान के साथ होता है।
