श्रीनगर, 29 सितंबर (आईएएनएस)। भाजपा विधायकों ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा से वॉकआउट किया। उन्होंने एक दिन पहले सदन में राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव के पारित होने के विरोध में ऐसा किया।
राज्य का दर्जा देने वाले प्रस्ताव पर चर्चा की इजाजत देने के स्पीकर के फैसले के विरोध में भाजपा विधायक विधानसभा से बाहर चले गए।
पार्टी ने स्पीकर पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2000 के स्वायत्तता प्रस्ताव और 2024 के विशेष दर्जे वाले प्रस्ताव का जिक्र होने पर आपत्ति जताने के बावजूद राज्य का दर्जा देने वाले प्रस्ताव पर चर्चा की इजाजत दी।
यह घटनाक्रम तब हुआ, जब विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने सदन में फिर से यह मुद्दा उठाया और स्पीकर को हटाने की मांग की।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किया गया राज्य का दर्जा देने वाला प्रस्ताव सोमवार को भाजपा सदस्यों के विरोध के बीच पारित हो गया।
भाजपा ने सोमवार को स्पीकर से कहा था कि उन्होंने अब्दुल रहीम राथर को स्पीकर पद से हटाने के लिए एक नोटिस दिया है और इसलिए उन्हें कुर्सी छोड़ देनी चाहिए। इसके जवाब में अब्दुल राथर ने भाजपा से कहा कि उन्होंने नोटिस नहीं पढ़ा है और सदन की प्रक्रिया के अनुसार, उन्हें हटाने का प्रस्ताव 14 दिनों के बाद सूचीबद्ध किया जाएगा।
बाद में भाजपा विधायक सदन के बीचोंबीच (वेल में) आ गए और उन्होंने एक नकली कार्यवाही की। सदन में हंगामे के बावजूद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के समर्थन में भाषण दिया, जिसे बाद में सदन ने पास कर दिया।
एक और दिलचस्प बात यह हुई कि सोमवार को राज्य का दर्जा बहाल करने वाले प्रस्ताव के समर्थन में भाषण देते हुए उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा को बताया कि कानून और संसदीय मामलों के मंत्री होने के बावजूद उन्हें पता चला कि लॉ सेक्रेटरी ने विधानसभा स्पीकर को एक पत्र लिखकर प्रस्ताव के खिलाफ अपनी राय दी थी।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी ने भी मुख्यमंत्री की जानकारी के बिना स्पीकर को पत्र लिखा था। ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि हम एक केंद्रशासित प्रदेश हैं।
राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पास होने के बाद विधानसभा सचिवालय ने इसे मुख्य सचिव के पास भेज दिया है, ताकि इसे केंद्र सरकार तक पहुंचाया जा सके।
