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नंदीग्राम उपचुनाव: मिलन प्रधान की जमानत के लिए कांग्रेस ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया

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कोलकाता, 23 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल कांग्रेस ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में मिलन प्रधान की जमानत के लिए याचिका दायर की। मिलन प्रधान 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार हैं।

मिलन प्रधान के वकील ने जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल बेंच के सामने जमानत की अर्जी दाखिल की। ​​उन्होंने दलील दी कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उनके क्लाइंट चुनाव लड़ रहे हैं।

अर्जी में मिलन प्रधान के वकील ने तर्क दिया कि चूंकि उनके क्लाइंट नंदीग्राम में होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार हैं, इसलिए इस मामले की सुनवाई तुरंत होनी चाहिए। कोर्ट ने अर्जी स्वीकार कर ली है और उम्मीद है कि इस हफ्ते मामले की सुनवाई होगी।

पश्चिम बंगाल की जिला अदालतों के आदेश के बाद मिलन प्रधान अभी दो मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। 2007 के एक हत्या के मामले में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। एक अन्य मामले में कोर्ट ने उन्हें 5 अक्टूबर तक जेल भेज दिया था। उन्हें 23 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश करने का निर्देश दिया गया था।

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे और नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

मिलन प्रधान को 18 सितंबर की शाम को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस ऐलान के कुछ घंटे बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके नेतृत्व वाला तृणमूल कांग्रेस गुट नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा।

ममता बनर्जी का यह ऐलान उनके गुट की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान द्वारा नंदीग्राम से अपना नामांकन वापस लेने के कुछ ही समय बाद आया।

इस बीच, मिलन प्रधान की पत्नी अर्पिता प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो संदेश पोस्ट कर अपने पति की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए।

अर्पिता ने पूछा कि कांग्रेस द्वारा पार्टी उम्मीदवार के तौर पर उनके नाम की घोषणा के तुरंत बाद मेरे पति को गिरफ्तार कर लिया गया। वे नियमित रूप से वोट डालने जाते थे और त्योहारों के समय इलाके में ही रहते थे। इतने लंबे समय तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। अब, कांग्रेस द्वारा उपचुनाव के उम्मीदवार के तौर पर उनका नाम घोषित किए जाने के बाद उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया।

इस मुद्दे पर राज्य सरकार का तर्क है कि उपचुनावों से पहले लंबे समय से लंबित सभी गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंटों पर अमल करने के निर्देशों के बाद मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गया था।