शिमला, 8 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिमाचल प्रदेश सरकार ने गुरुवार को जीएसटी काउंसिल द्वारा प्रस्तावित सुधारों का स्वागत किया। सरकार का कहना है कि इन उपायों से टैक्स सिस्टम टैक्सपेयर्स के लिए ज्यादा सुविधाजनक बनेगा और नियमों का पालन करने की प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
प्रस्तावित सुधारों में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, असेसमेंट, एडजुडिकेशन और अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं। इनसे गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के नियमों का पालन करना आसान, ज्यादा पारदर्शी और ज्यादा कुशल बनने की उम्मीद है।
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक नई दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई। हिमाचल प्रदेश सरकार ने छोटे टैक्सपेयर्स को राहत देने वाले प्रस्तावों के साथ-साथ डिफेंस एस्टेब्लिशमेंट और सीएसडी कैंटीन से जुड़े उपायों का भी स्वागत किया।
टोल वसूलने के अधिकार को लीज पर देने से जुड़े राज्य-विशेष के मुद्दे पर भी चर्चा की गई और राज्य के टोल कलेक्शन सिस्टम से जुड़ी प्रस्तावित जीएसटी छूट का स्वागत किया गया।
ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए नियमों का पालन आसान बनाने वाले उपायों का समर्थन करते हुए राज्य ने इस बात पर जोर दिया कि जीएसटी सुधारों में नियमों का पालन आसान बनाने और प्रभावी ढंग से लागू करने के बीच सही संतुलन बना रहना चाहिए।
सरकार ने कहा कि ऐसे प्रस्तावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जानी चाहिए जिनसे नियमों को लागू करने में ढील आ सकती है, धोखाधड़ी को बढ़ावा मिल सकता है या वैध रेवेन्यू पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसा इसलिए किया जाना चाहिए ताकि यह पक्का हो सके कि टैक्सपेयर्स को सुविधा देने के चक्कर में रेवेन्यू की सुरक्षा और टैक्स चोरी रोकने के प्रयासों से समझौता न हो।
राज्य सरकार ने वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए जीएसटी लागू होने से राजस्व पर पड़ने वाले असर के बदले पूरा मुआवजा देने का मुद्दा भी उठाया।
सरकार ने फिर से कहा कि पांच साल तक हर साल 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी सुनिश्चित करके राज्य के राजस्व की सुरक्षा की जानी चाहिए और उसके बाद भी राजस्व सुरक्षा तब तक जारी रहनी चाहिए जब तक राज्य का वास्तविक राजस्व पांचवें साल के लिए तय सुरक्षित राजस्व के स्तर तक न पहुंच जाए।
पहाड़ी राज्यों की खास चिंताओं और जरूरतों को पूरा करने के लिए पहाड़ी राज्यों पर मंत्रियों के समूह (जीओएम) के गठन का प्रस्ताव भी फिर से दोहराया गया। इसके अलावा, राज्य ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) पर टैक्स की दर कम करके फार्मास्युटिकल सेक्टर में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को ठीक करने की जरूरत पर जोर दिया।
इसमें कहा गया है कि इस तरह के बदलावों से इनपुट टैक्स क्रेडिट के जमा होने और उससे जुड़े रिफंड क्लेम को कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही घरेलू एपीआई मैन्युफैक्चरिंग और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को और बढ़ावा मिलेगा।
