Wednesday, May 27, 2026
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पश्चिम बंगाल: कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व अधीक्षक के खिलाफ जांच के आदेश

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कोलकाता, 27 मई (आईएएनएस)। कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अधीक्षक पद से हटाए जाने के कुछ दिनों बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने अब डॉ. अंजन अधिकारी के खिलाफ लापरवाही के कई आरोपों को लेकर विभागीय जांच का आदेश दिया है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार सुबह बताया कि यह आदेश मंगलवार रात को जारी किया गया था। फिलहाल उनका तबादला हो चुका है और वे उत्तरी बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले में स्थित रायगंज सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कार्यरत हैं। राज्य विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता संभालने के बाद नई सरकार द्वारा राज्य में किया गया यह पहला बड़ा तबादला था।

कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भारत का सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल है, जिसकी स्थापना 28 जनवरी, 1835 को लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने की थी।

स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश में कहा कि कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट-सह-वाइस प्रिंसिपल के तौर पर कार्य करते हुए डॉ. अंजन अधिकारी पर गंभीर लापरवाही, कर्तव्य में कोताही और प्रशासनिक चूक के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद सरकार ने उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का फैसला किया।

विभागीय जांच का आदेश जारी होने के साथ ही कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व अधीक्षक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

सोमवार को राज्य सरकार ने डॉ. अधिकारी को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अधीक्षक पद से हटा दिया और उनका तबादला रायगंज सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में कर दिया। यह कार्रवाई उन आरोपों के बाद की गई, जिनमें कहा गया था कि अस्पताल प्रणाली के भीतर सक्रिय दलाल सिंडिकेट द्वारा मरीजों को परेशान किया जा रहा था।

पदभार संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरे राज्य के सरकारी अस्पतालों में ‘रेफरल कल्चर’ (मरीजों को दूसरे अस्पतालों में भेजने की प्रथा) के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की थी।

15 मई को उन्होंने एसएसकेएम अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, 12 मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों और प्राचार्यों के साथ एक बैठक की अध्यक्षता की थी। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया था कि मरीजों की शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अगर कम से कम कुछ बेड भी उपलब्ध हों, तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए।

हालांकि, इस तरह की चेतावनी के बावजूद यह आरोप लगे कि मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों से मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा था। इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. अधिकारी को उनके पद से हटा दिया।