Wednesday, July 29, 2026
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दिल्ली क्राइम ब्रांच ने हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल से जुड़े दो मुख्य आरोपियों को दबोचा, अब तक 18 गिरफ्तार

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नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हथियारों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी और पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) से संदिग्ध संबंध रखने वाले आतंकी नेटवर्क से जुड़े दो अन्य मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

ये गिरफ्तारियां इस साल की शुरुआत में दर्ज हथियारों की तस्करी और टेरर फंडिंग के एक बड़े मामले की चल रही जांच के तहत की गईं।

क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस ताजा ऑपरेशन में महफूज अली उर्फ ​​बॉबी उर्फ ​​कबूतर (43) और मो. अहमद (35) को गिरफ्तार किया गया। दोनों भगोड़े गैंगस्टर शाहबाज अंसारी के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल हथियारों की तस्करी करने वाले ग्रुप के अहम सदस्य बताए जाते हैं।

इन गिरफ्तारियों के साथ, इस मामले में पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या 18 हो गई है। पुलिस ने अब तक इस नेटवर्क से जुड़े अलग-अलग आरोपियों से 32 आधुनिक विदेशी हथियार और 363 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।

यह ऑपरेशन क्राइम ब्रांच के एंटी-रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल (एआरएससी) की टीम ने किया। इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर मान सिंह और सुंदर गौतम ने किया, जबकि इसकी निगरानी एसीपी संजय कुमार नागपाल और डीसीपी चंद्र कुमार सिंह ने की।

ये गिरफ्तारियां एफआईआर नंबर 49/2026 के सिलसिले में की गईं। यह एफआईआर 14 मार्च को क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।

जांचकर्ताओं ने बताया कि यह मामला हथियारों की तस्करी और टेरर मॉड्यूल से जुड़ा है। यह ग्रुप कथित तौर पर भारत में आधुनिक विदेशी हथियार लाता था और उन्हें संगठित अपराधी गिरोहों, आतंकवादी तत्वों और अन्य राष्ट्र-विरोधी नेटवर्क को सप्लाई करता था।

इन ताजा गिरफ्तारियों से पहले, इस मामले में 16 आरोपियों को पकड़ा जा चुका था। पुलिस ने उनके पास से 28 हथियार (जिनमें एक सब-मशीन गन भी शामिल थी) और 281 जिंदा कारतूस बरामद किए थे।

पुलिस ने महफूज अली (जिसे बॉबी और कबूतर के नाम से भी जाना जाता है) की पहचान उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद के रहने वाले के तौर पर की। उसने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की और 1998 में स्कूल छोड़ने के बाद शुरुआत में अपने परिवार के ताला बनाने के कारोबार में काम किया।

जांचकर्ताओं के अनुसार, महफूज धीरे-धीरे उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सक्रिय अपराधी गिरोहों से जुड़ गया। उसे पहली बार 2006 में गिरोहों की आपसी दुश्मनी से जुड़े हत्या की कोशिश के मामले में गिरफ्तार किया गया था। समय के साथ, वह हिंसक गैंग वॉर और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में शामिल कई संगठित अपराधी समूहों का सक्रिय सदस्य बन गया।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वह कई हत्या के मामलों में शामिल रहा है, जिनमें साबिर अली उर्फ ​​नन्हे, इरशाद, अकील मामा, जाहिद और नदीम उर्फ ​​चाचा फाडू की हत्याएं शामिल हैं। उसका नाम दिल्ली में सक्रिय कई कुख्यात अपराधियों और गैंगस्टरों से भी जुड़ा रहा है।

खबरों के मुताबिक, 2019 में महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के एक मामले में उसका नाम सामने आया था, जिसके बाद वह काफी समय तक फरार रहा।

जांचकर्ताओं का दावा है कि महफूज के जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा से करीबी संबंध थे और उसने कथित तौर पर कई आपराधिक गतिविधियों में उसकी मदद की थी।

पुलिस के अनुसार, 2021 में उसने पंजाबी गायक सिद्धू मूसे वाला की हत्या में शामिल शूटरों की आवाजाही में मदद की थी। अधिकारियों का आरोप है कि अपराध के बाद, उसने शूटरों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और इंटरनेट डोंगल इकट्ठा किए और उन डिवाइस को यमुना नदी में फेंककर इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट कर दिए।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि 2022 में, हाशिम बाबा के निर्देशों पर और एक अन्य आपराधिक साथी राशिद केबल के साथ मिलकर, महफूज ने विदेशी पिस्तौल की एक खेप ली और उसे पंजाब से आए गैंगस्टर जग्गू भगवानपुरिया के साथियों तक पहुंचाया।

जांचकर्ताओं का कहना है कि इस वजह से वह उत्तर भारत में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों को अवैध विदेशी हथियार सप्लाई करने की चेन में एक अहम कड़ी बन गया था।