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दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएसआईएस साजिश मामले के आरोपी को इलाज के लिए दी 30 दिन की कस्टडी बेल

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नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने आईएसआईएस साजिश मामले के एक आरोपी को सर्जरी और चिकित्सा उपचार के लिए 30 दिनों की कस्टडी बेल प्रदान की है। कोर्ट ने आरोपी को दिल्ली-एनसीआर में अपनी पसंद के किसी निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी है।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की डिवीजन बेंच ने यह आदेश फरहान अंसार सुसे की उस अपील पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें उसने पटियाला हाउस स्थित विशेष एनआईए अदालत द्वारा चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि सुसे को उम्बिलिकल हर्निया की सर्जरी करानी है और वह चिकित्सकीय रूप से अस्वस्थ है, इसलिए उसे अपने खर्च पर निजी अस्पताल में इलाज कराने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने मुंबई में इलाज कराने की उसकी मांग ठुकरा दी। अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र के पडघा और आसपास के क्षेत्रों में आरोपी के नेटवर्क को देखते हुए इस स्तर पर मुंबई में इलाज की अनुमति देना उचित नहीं होगा।

कोर्ट ने कहा कि आरोपी को दिल्ली-एनसीआर के किसी भी निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी, लेकिन वह इस दौरान न्यायिक हिरासत में ही रहेगा। सुसे पर 2023 में दर्ज एनआईए मामले में मुकदमा चल रहा है। उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।

एनआईए के अनुसार, सुसे के खिलाफ मार्च 2024 में आरोपपत्र और जून 2024 में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि सुसे अन्य आरोपियों के साथ आईएसआईएस से जुड़ी एक साजिश का हिस्सा था तथा रंगदारी वसूली के जरिए आतंकी संगठन के लिए धन जुटाने और उसके संदेशों को फैलाने में शामिल था।

फिलहाल मामला आरोप तय करने के चरण में है। आरोपी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यकाम ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुख्य आरोप रंगदारी वसूली का है और आईएसआईएस से संबंध अभी मुकदमे में साबित होना बाकी है।

एनआईए ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुसे भारत में आईएसआईएस का सक्रिय सदस्य था और सहआरोपी साकिब नाचन द्वारा संचालित नेटवर्क के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक था।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि सुसे उम्बिलिकल हर्निया, ब्रोंकियल अस्थमा और टाइप-2 मधुमेह से पीड़ित है। दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल के डॉक्टरों ने उसकी सर्जरी की सलाह दी है। अदालत ने निर्देश दिया कि निजी अस्पताल में इलाज का पूरा खर्च सुसे स्वयं वहन करेगा। अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उसके साथ उसकी पत्नी या बच्चों में से अधिकतम दो करीबी परिवारजन रह सकते हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि सुसे किसी अन्य रिश्तेदार, मित्र या परिचित से नहीं मिल सकेगा और न ही आरोपपत्र में नामित किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क करेगा।

खंडपीठ ने कहा कि 30 दिन की कस्टडी बेल अवधि समाप्त होने पर सुसे को वापस जेल भेज दिया जाएगा। किसी भी अतिरिक्त अवधि पर निर्णय चिकित्सकीय सलाह के आधार पर लिया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश में की गई टिप्पणियां अन्य लंबित मामलों, जिनमें आरोपी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका और माफी संबंधी अपील शामिल हैं, पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं डालेंगी।