नई दिल्ली, 29 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील पर वर्चुअल सुनवाई के दौरान चलती कार से पेश होने पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। अदालत ने कहा कि वर्चुअल सुनवाई की सुविधा का मतलब यह नहीं है कि अदालत की गरिमा और अनुशासन से समझौता किया जाए या न्यायिक कार्यवाही में बाधा पहुंचे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ऑनलाइन सुनवाई की सुविधा केवल पक्षकारों और वकीलों की सहूलियत के लिए है, लेकिन इसका उपयोग इस तरह नहीं किया जा सकता जिससे अदालत की कार्यवाही की गंभीरता और मर्यादा प्रभावित हो।
जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की सिंगल जज बेंच ने यह जुर्माना उस वकील पर लगाया जो ‘डिक्री होल्डर’ (फैसले से लाभ पाने वाले पक्ष) की ओर से पेश हुए थे। यह मामला साउथ इंडियन बैंक लिमिटेड और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के खिलाफ दायर दो जुड़ी हुई ‘एनफोर्समेंट याचिकाओं’ (फैसला लागू कराने की याचिकाओं) से जुड़ा था।
शुरुआत में ही बेंच ने देखा कि डिक्री होल्डर्स की ओर से पेश वकील नचिकेता गोयल कार्यवाही में चलती कार से शामिल हो रहे थे।
हाईकोर्ट ने कहा, “यह कोर्ट वर्चुअल सुनवाई से मिलने वाली सुविधा की सराहना करता है, लेकिन ऐसी सुविधा कोर्ट की मर्यादा की कीमत पर नहीं मिल सकती और न ही इससे न्यायिक कार्यवाही के संचालन में कोई बाधा आनी चाहिए।”
हाईकोर्ट ने कहा, “जब इस कोर्ट को एक दिन में 70 से ज्यादा मामलों को देखना होता है तो सुनवाई के दौरान बैकग्राउंड का शोर और हलचल कोर्ट के काम-काज में बाधा डालती है।”
इस आदेश में ‘इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियम, 2025’ का भी जिक्र किया गया है। इन नियमों के अनुसार, वकीलों को कोशिश करनी चाहिए कि वे गाड़ियों से कार्यवाही में शामिल न हों, सिवाय उन खास हालात के जब कोर्ट से इसकी इजाजत मिली हो।
जस्टिस शुक्ला ने कहा, “यह जरूरत सिर्फ प्रक्रिया से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह पक्का करने के लिए है कि जब वकील वर्चुअली पेश हों, तो वे ऐसी जगह पर हों जो इस कोर्ट के सही कामकाज के लिए सही माहौल दे।”
आदेश में यह भी कहा गया कि इस मामले में कोई खास हालात नहीं थे और वकील का व्यवहार नियमों का उल्लंघन था। ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए, डिक्री होल्डर के वकील पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाता है। यह रकम आज से एक हफ्ते के अंदर दिल्ली हाईकोर्ट लीगल सर्विसेज कमेटी को देनी होगी।”
सुनवाई के दौरान बेंच ने यह भी गौर किया कि 13 नवंबर 2024 के आर्बिट्रल अवॉर्ड (जिसे लागू करवाना था) पर स्टैम्प ड्यूटी 24 दिसंबर 2025 को चुकाई गई थी। यह तारीख ‘बिना किसी शक के, अवॉर्ड बनने की तारीख से एक महीने से ज्यादा बाद की थी और हाईकोर्ट के पहले के एक फैसले के मुताबिक नहीं थी।
इस दौरान, डिक्री होल्डर्स की तरफ से पेश हुए वकील मनीष डेम्बला ने बताया कि स्टैम्प ड्यूटी और पेनल्टी कलेक्टर के पास पहले ही जमा कर दी गई है। उन्होंने एक हफ्ते के अंदर इसका सबूत रिकॉर्ड पर पेश करने का भरोसा भी दिलाया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पेमेंट का सबूत एक हफ्ते के अंदर जमा किया जाए और मामलों की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को तय की।
