नई दिल्ली, 8 मई (आईएएनएस)। यमुना नदी को साफ करने का संकल्प लेते हुए उपराज्यपाल टीएस संधू ने शुक्रवार को दिल्ली के भविष्य के विकास के पांच जरूरी स्तंभों के रूप में स्थिरता, समावेश, संस्कृति, नवाचार, आर्थिक विकास और करुणा की पहचान की।
जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (एसआईएस) में आयोजित एक सम्मान समारोह में उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि शासन व्यवस्था को जवाबदेह, सुलभ और मानवीय होना चाहिए।
एलजी ने वायु प्रदूषण, यमुना नदी की सफाई, जल निकायों का पुनरुद्धार, प्रभावी कचरा प्रबंधन, सतत गतिशीलता और हरित आवरण में वृद्धि को दिल्ली के शहरी विजन के लिए केंद्रीय मुद्दे बताया। उन्होंने कहा कि यमुना को न केवल साफ किया जाना चाहिए, बल्कि इसे इस शहर की एक जीवंत पारिस्थितिक और सांस्कृतिक जीवनरेखा के रूप में पुनर्जीवित भी किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इसके साथ ही, मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, पैदल चलने वालों के लिए अनुकूल सड़कें, साइकिल चलाने के लिए बुनियादी ढांचा और एकीकृत शहरी नियोजन दिल्ली के बदलाव के अगले चरण को परिभाषित करेंगे।
एलजी ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार और लोगों को केवल तात्कालिक उपायों से आगे बढ़कर दीर्घकालिक पर्यावरणीय नियोजन के प्रति प्रतिबद्ध होना होगा।
इस बात पर जोर देते हुए कि विकास और तरक्की सबको साथ लेकर चलने वाली होनी चाहिए, उपराज्यपाल ने कहा कि विकास के फायदे सबको मिलने चाहिए और अवसर भी सबके लिए सुलभ होने चाहिए। दिल्ली का भविष्य महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं, दिव्यांगों, प्रवासी मजदूरों, उद्यमियों, कलाकारों, छात्रों और कमजोर तबकों का भी उतना ही होना चाहिए।
संधू ने कहा कि शहरी विकास सिर्फ भौतिक बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसे सामाजिक बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सुरक्षा, सुलभता और गरिमा, को भी मजबूत करना होगा।
उपराज्यपाल ने कहा कि टेक्नोलॉजी और शासन-प्रशासन को मिलकर काम करना चाहिए, ताकि पारदर्शी, कुशल और नागरिक-हितैषी व्यवस्थाएं बनाई जा सकें। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य सीधा-सा होना चाहिए: ऐसा शासन जो जवाबदेह, सुलभ और मानवीय हो।
शहर की समृद्ध संस्कृति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली दुनिया भर में सबसे समृद्ध सांस्कृतिक पहचान वाले शहरों में से एक है। उन्होंने कहा कि यहां के स्मारक, साहित्य, खान-पान की परंपराएं, संगीत, हस्तशिल्प, भाषाएं, संग्रहालय, त्योहार और कला से जुड़े समुदाय मिलकर इस शहर की आत्मा का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम दिल्ली को आधुनिक बना रहे हैं, हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम इसकी सांस्कृतिक यादों को न खो दें। इसके बजाय, हमें एक वैश्विक सांस्कृतिक राजधानी के तौर पर दिल्ली की स्थिति को और मज़बूत करना चाहिए।
संधू ने कहा कि संग्रहालयों, सार्वजनिक कला, रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक पर्यटन, विरासत के जीर्णोद्धार और सामुदायिक जगहों में निवेश करके हम एक ऐसा शहर बना सकते हैं, जहां संस्कृति को सिर्फ निष्क्रिय रूप से सहेजकर न रखा जाए, बल्कि उसे सक्रिय रूप से जिया जाए।
नवाचार और आर्थिक विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में न सिर्फ एक प्रशासनिक राजधानी के तौर पर, बल्कि ज्ञान, स्टार्टअप, पर्यटन, आतिथ्य, रचनात्मक अर्थव्यवस्था और व्यापक सेवा क्षेत्र के एक अग्रणी केंद्र के तौर पर उभरने की पूरी क्षमता है।

