नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को कंबोडिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों के गिरोहों से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 11 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए होने वाले 7.25 करोड़ रुपए के संभावित नुकसान को रोका गया।
पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रेटेजिक ऑपरेशन्स (आईएफएसओ) यूनिट की गिरफ्तारियों से आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में फैले साइबर क्राइम के मामलों का खुलासा हुआ। इसके साथ ही धोखाधड़ी से जुड़े एचडीएफसी और एसबीआई खातों में मौजूद 1.96 करोड़ रुपए को फ्रीज या होल्ड कर दिया गया।
आईएफएसओ यूनिट के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) गौरव त्यागी ने बताया कि एक मामले की जांच 69 वर्षीय प्रदीप कुमार दास की शिकायत पर शुरू हुई थी। दास इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में रिटायर्ड साइंटिस्ट ‘एफ’ और डायरेक्टर रह चुके हैं। उन्होंने 1.25 करोड़ रुपए की ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी की शिकायत की थी।
एक बयान के अनुसार, जांच के दौरान पुलिस ने द्वारका के सेक्टर-7 में एक होटल और एक फ्लैट की पहचान की। इसके साथ ही, मोबाइल नंबर का भी पता चला, जो एम ट्रेडर्स के एचडीएफसी बैंक खाते से जुड़ा था और साइबर क्राइम में इस्तेमाल हो रहा था।
मुख्य हैंडलर की पहचान यूपी के एटा निवासी अनीश खान के तौर पर हुई। वह टेलीग्राम के जरिए विदेश में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था और साइबर क्राइम से जुड़े लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते को ऑपरेट/मैनेज करता था।
पुलिस के मुताबिक, जांच में पता चला कि वह कथित तौर पर 5.5 प्रतिशत कमीशन पर काम कर रहा था। यह कमीशन यूएसडीटी में लिया जाता था और बाद में अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज/प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय रुपए में बदल लिया जाता था।
पुलिस ने बताया कि अन्य आरोपियों की पहचान पश्चिम बंगाल के महफूजुर रहमान और इजहार आलम एवं जम्मू-कश्मीर के अल्ताफ हुसैन और यूपी के मुजफ्फरनगर के इंतखाब के तौर पर हुई है।
एक अन्य संबंधित मामले के मास्टरमाइंड की पहचान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के डाबरी गांव निवासी 31 वर्षीय अनिल सागू उर्फ कृष्णा के तौर पर हुई। उसे स्पेशल सेल द्वारा दर्ज एक मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों की पहचान मेरठ के अकाउंट होल्डर नीरज कुमार मित्तल, मेरठ में बैंक अकाउंट के लिए इंट्रोड्यूसर कंवर पाल, यूपी के गजरौला निवासी सैफ अली खान, शिमला जिले के रामपुर निवासी रणबीर और दिल्ली के मंगोलपुरी निवासी प्रभात राय उर्फ आशुतोष के रूप में हुई है।
जांच के दौरान, पुलिस ने एमआर ट्रेडर्स के एचडीएफसी बैंक से जुड़ी चेक बुक बरामद की। इसके अलावा, छह मोबाइल भी जब्त किए गए, जिनमें केस से जुड़े व्हाट्सऐप चैट, टेलीग्राम चैट, क्रिप्टोकरेंसी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और अन्य अहम सबूत मौजूद थे।
पुलिस ने बताया कि सात टेलीग्राम चैनलों की पहचान की गई है, जिनके जरिए आरोपी ‘म्यूल बैंक अकाउंट’ की खरीद-फरोख्त कर रहे थे।
टेलीग्राम और व्हाट्सऐप चैट के विश्लेषण से बैंक क्रेडेंशियल्स साझा करने की बात सामने आई, जिससे आरोपी अलग-अलग राज्यों में दर्ज 78 नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) शिकायतों से जुड़ गए। मामले की आगे जांच चल रही है। बयान में कहा गया है कि इन 78 एनसीआरपी शिकायतों में शामिल कुल रकम 73 करोड़ रुपए थी।
